आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2026: अमरावती को मिलेगी एकमात्र राजधानी की मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
अमरावती, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। इस विधेयक के माध्यम से अमरावती को आधिकारिक रूप से राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त होगी।
यह निर्णय तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व में एनडीए सरकार की लंबे समय से चल रही नीति को कानूनी रूप देने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके पहले, 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसने विधेयक के लिए रास्ता साफ किया।
दरअसल, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 के तहत राज्य के विभाजन के बाद हैदराबाद को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की साझा राजधानी बनाया गया था। इस व्यवस्था की समय सीमा अधिकतम 10 वर्ष निर्धारित की गई थी, जिसके बाद हैदराबाद केवल तेलंगाना की राजधानी बनना था और आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी स्थापित करनी थी।
इसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने विचार-विमर्श, योजना और परामर्श के माध्यम से अमरावती को नई राजधानी के रूप में चिन्हित किया। इस दिशा में प्रशासनिक, विधायी और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, ताकि अमरावती को एक पूर्ण विकसित राजधानी के रूप में स्थापित किया जा सके।
अब प्रस्तावित संशोधन विधेयक के माध्यम से 2014 के कानून की धारा 5(2) में बदलाव कर अमरावती का नाम आधिकारिक रूप से राज्य की राजधानी के रूप में शामिल किया जाएगा। यह संशोधन 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा।
आंध्र सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य राज्य की राजधानी के संबंध में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता को समाप्त करना और कानूनी रूप से स्पष्ट स्थिति प्रदान करना है। इसे आंध्र प्रदेश के विकास और प्रशासनिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।