मोदी की स्वीडन यात्रा से आयुर्वेद को वैश्विक मंच, स्टिना एंडरसन बोलीं — यूरोप के लिए ऐतिहासिक अवसर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा को आयुर्वेद, वेलनेस और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत-स्वीडन सहयोग को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर माना जा रहा है। आयुर्वेद स्वीडन एसोसिएशन की चेयरपर्सन स्टिना एंडरसन ने इस यात्रा को स्वीडन और समूचे यूरोप में आयुर्वेद को मुख्यधारा में स्थापित करने का दुर्लभ अवसर करार दिया है।
स्टिना एंडरसन की प्रतिक्रिया
स्टिना एंडरसन ने एक विशेष बातचीत में कहा, 'यह एक शानदार अनुभव था। मैं प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर बहुत उत्साहित हूँ। यह स्वीडन के लिए और खासतौर पर आयुर्वेद के लिए बहुत बड़ा कदम है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वैद्यों और चिकित्सकों के लिए स्वीडन आकर अपना ज्ञान साझा करने और स्वीडिश नागरिकों के लिए भारत जाकर सीखने का यह सुनहरा मौका है।
एंडरसन ने आगे जोड़ा, 'जब हम सहयोग समझौते स्थापित करते हैं, तो आयुर्वेद को नॉर्डिक दृष्टिकोण से समझना आसान हो जाता है, जो भारत से काफी अलग है।' उनके अनुसार, यह सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पुल दोनों देशों के स्वास्थ्य तंत्र को समृद्ध कर सकता है।
जीवनशैली रोगों में आयुर्वेद की भूमिका
एंडरसन ने रेखांकित किया कि आज 80 प्रतिशत बीमारियाँ जीवनशैली से जुड़ी हैं और आयुर्वेद इनका प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। उनके शब्दों में, 'अपनी सेहत के बिना हम दुनिया में सही योगदान नहीं दे सकते। आयुर्वेद एक गहरा विज्ञान है, जिसे भारत ने सदियों तक सहेजकर रखा है। अब स्वीडन भी इसके लिए तैयार है।'
उन्होंने रोजमर्रा की दिनचर्या और ऋतु के अनुसार आहार-विहार को प्राथमिकता देने की सलाह दी, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से संतुलित रह सके। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में वैकल्पिक और पूरक चिकित्सा पद्धतियों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
आधुनिक तकनीक के साथ आयुर्वेद का एकीकरण
एंडरसन ने आयुर्वेद को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नैनोटेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने की संभावना पर भी ज़ोर दिया। उनका मानना है कि जब आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत किया जाता है, तो न केवल स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा की लागत भी घटती है और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
व्यापार और द्विपक्षीय सहयोग
कॉन्फेडरेशन ऑफ स्वीडिश एंटरप्राइज के डायरेक्टर जनरल जान-ओलोफ जैके ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का स्वागत करते हुए कहा, 'हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री मोदी हमारे यहाँ आए। स्वीडन एक इनोवेटिव और विकसित देश है, लेकिन छोटा है। भारत में प्रतिभाशाली युवा आबादी और तेज़ी से बढ़ता बाज़ार है।'
जैके ने ईयू-इंडिया मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी और कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए व्यापार की नई संभावनाएँ खोलेगा। उन्होंने प्रक्रियाओं को सरल बनाने और सीमा शुल्क को सुगम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा से भारत और स्वीडन के बीच स्वास्थ्य सहयोग समझौतों की नींव पड़ सकती है, जिससे आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और उत्पाद-निर्यात को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की मान्यता का दायरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है, और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में है।