भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने नायडू की जनसंख्या अपील का समर्थन किया, डेमोग्राफी बदलाव पर जताई गहरी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक संजय उपाध्याय ने रविवार, 17 मई 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की उस अपील का पूर्ण समर्थन किया, जिसमें तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। उपाध्याय ने कहा कि हिंदू समाज को जनसंख्या असंतुलन रोकने के लिए अधिक संतानें पैदा करनी चाहिए।
नायडू की अपील पर समर्थन
विधायक संजय उपाध्याय ने कहा, 'हम चाहते हैं कि हिंदू अधिक बच्चे पैदा करें। अगर जनसंख्या असंतुलन बना रहा और मुस्लिम आबादी तेज़ी से बढ़ती रही तो देश की डेमोग्राफी बदल जाएगी, जिसका असर देश की सुरक्षा और स्वभाव पर पड़ेगा।' उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार की उस मुहिम को 'स्वागतयोग्य' बताया जिसके तहत तीसरे बच्चे पर ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 की सहायता राशि देने का प्रावधान है।
उपाध्याय ने केंद्र सरकार के 'हम दो, हमारे दो' के संदेश का हवाला देते हुए कहा, 'हम सरकार की अपील मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ 'चार और हमारे चालीस' की बात होती है।' उनका यह बयान सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस का विषय बन सकता है।
नीट पेपर लीक पर प्रतिक्रिया
नीट पेपर लीक विवाद पर उपाध्याय ने कहा कि यह घटना 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है, लेकिन उन्होंने यह भी तर्क दिया कि नीट और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पहले व्याप्त धांधली और भ्रष्टाचार को 'काफी हद तक समाप्त' किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इस प्रक्रिया को खत्म करवाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें भ्रष्टाचार का लाभ नहीं मिल पा रहा।
उपाध्याय ने माँग की कि नीट की परीक्षा प्रक्रिया और अधिक सख्त बनाई जाए, साथ ही विद्यार्थियों के लिए सुगम भी हो। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल अपराधियों को 'सख्त से सख्त सज़ा' मिलनी चाहिए।
थल सेना प्रमुख के बयान पर गर्व
थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के पाकिस्तान संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उपाध्याय ने कहा, 'सभी भारतवासियों को अपनी सेना पर गर्व है। सेना प्रमुख का बयान हर भारतीय का सीना चौड़ा करने वाला है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारतीय सेना के सामर्थ्य और पुरुषार्थ का प्रतीक है।'
भोजशाला और जनसंख्या नीति पर रुख
विधायक ने भोजशाला मामले में न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'ऐतिहासिक महत्व' का निर्णय बताया। इसके साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जनसंख्या नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि वे 'सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी' समझते हुए अधिक संतानें पैदा करें और उन्हें अच्छी शिक्षा व संस्कार दें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जनसंख्या नीति पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।