नीट पेपर लीक 2026: कपिल सिब्बल का सरकार पर हमला, 2019 से 65-70 लीक की घटनाएं, जवाबदेही की मांग

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नीट पेपर लीक 2026: कपिल सिब्बल का सरकार पर हमला, 2019 से 65-70 लीक की घटनाएं, जवाबदेही की मांग

सारांश

नीट पेपर लीक कोई नई घटना नहीं — यह एक दशक से चला आ रहा पैटर्न है। कपिल सिब्बल ने 2019 से अब तक 65-70 लीक की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार से जवाबदेही मांगी और परीक्षा प्रणाली को स्वतंत्र संस्था के तहत चलाने की मांग की।

मुख्य बातें

सांसद कपिल सिब्बल ने 12 मई 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीट पेपर लीक पर सरकार से जवाब मांगा।
2019 से अब तक 65 से 70 परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं, लाखों छात्र प्रभावित।
2016, 2021, 2024 और 2026 — बार-बार लीक की घटनाएं एक स्थापित पैटर्न का संकेत।
सिब्बल की मांग: तत्काल और निष्पक्ष जांच तथा परीक्षा प्रणाली को स्वतंत्र संस्था के तहत लाया जाए।
गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र सबसे अधिक प्रभावित; कई दोबारा परीक्षा देने में असमर्थ।

वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने 12 मई 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीट पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे और जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि 2019 से अब तक देश में 65 से 70 परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं।

मुख्य आरोप और मांगें

सिब्बल ने कहा कि 2016, 2021, 2024 और 2026 में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जो यह साबित करती हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक स्थापित पैटर्न बन चुका है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे छात्रों के साथ 'मन की बात' करें और स्पष्ट करें कि आखिर पेपर लीक क्यों हो रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

सिब्बल ने तर्क दिया कि जब देश 'विकसित भारत' की ओर बढ़ने का दावा कर रहा है, तब शिक्षा व्यवस्था की यह कमज़ोरी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में लीक होना केवल शैक्षणिक विफलता नहीं, बल्कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र और भविष्य के डॉक्टरों पर सीधा असर डालने वाली गंभीर समस्या है।

गरीब और मध्यम वर्ग पर असर

सिब्बल ने रेखांकित किया कि पेपर लीक की मार सबसे अधिक गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर पड़ती है, क्योंकि कई बार ये छात्र दोबारा परीक्षा देने की आर्थिक और मानसिक स्थिति में नहीं होते। उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

राजनीतिक आरोप और जांच पर सवाल

सिब्बल ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें हैं, वहां इस तरह के मामले अधिक सामने आते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि जांच के बावजूद ठोस नतीजा नहीं निकलता और कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

संरचनात्मक सुधार की मांग

सिब्बल ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली को सरकार से पूरी तरह अलग कर एक प्रोफेशनल और स्वतंत्र संस्था के तहत चलाया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इसे 'सिस्टम की बीमारी' बताते हुए कहा कि इसे 'गंभीर सर्जरी' की ज़रूरत है। उनका कहना था कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और संरचनात्मक सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक ये घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि पेपर लीक की समस्या किसी एक दल या सरकार तक सीमित नहीं रही — यह राज्यों में विभिन्न दलों की सरकारों के दौरान भी हुई है। असली सवाल यह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं को जवाबदेह बनाने का ढाँचा क्यों नहीं बना? सिब्बल का स्वतंत्र परीक्षा संस्था का सुझाव नया नहीं है, लेकिन इस पर राजनीतिक सहमति कभी नहीं बनी। जब तक परीक्षा सुधार को दलगत राजनीति से ऊपर नहीं रखा जाएगा, तब तक हर लीक के बाद बयानबाजी होती रहेगी और छात्र नुकसान उठाते रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक 2026 मामले में कपिल सिब्बल ने क्या मांग की?
कपिल सिब्बल ने नीट पेपर लीक मामले में तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को सरकार से अलग कर एक स्वतंत्र और प्रोफेशनल संस्था के तहत चलाया जाए।
2019 से भारत में कितने पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं?
कपिल सिब्बल के अनुसार 2019 से अब तक देश में 65 से 70 परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं।
नीट पेपर लीक से सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है?
सिब्बल के मुताबिक गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि कई बार वे दोबारा परीक्षा देने की आर्थिक और मानसिक स्थिति में नहीं होते।
नीट परीक्षा में पेपर लीक क्यों गंभीर है?
नीट देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। इसमें लीक होने से न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र और भविष्य के डॉक्टरों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
परीक्षा पेपर लीक रोकने के लिए क्या सुधार सुझाए गए हैं?
सिब्बल ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली को सरकार से पूरी तरह अलग कर एक प्रोफेशनल और स्वतंत्र संस्था के तहत चलाया जाए। इसके अलावा जवाबदेही तय करने और संरचनात्मक सुधार लाने की भी मांग की गई।
राष्ट्र प्रेस