रांची विधानसभा मार्च: JMM का दावा — छात्रों पर बल प्रयोग नहीं, BJP पर राजनीति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
रांची में 11 अगस्त को हुए 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर छिड़े विवाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पांडे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर छात्रों पर किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया गया और BJP केवल राजनीतिक फायदे के लिए इस घटना को तूल दे रही है।
JMM का पक्ष: आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई
मनोज पांडे ने कहा, 'क्या कोई पुलिस कार्रवाई हुई है? बल का जो भी इस्तेमाल हुआ, वह आत्मरक्षा में था।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शुरू से बल प्रयोग के विरुद्ध थी और सीएम हेमंत सोरेन के स्पष्ट निर्देश थे कि छात्रों पर सख्त कार्रवाई न हो। उनके अनुसार, पुलिस ने केवल स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए न्यूनतम कदम उठाए।
BJP पर पलटवार: दिल्ली प्रदर्शन का हवाला
JMM प्रवक्ता ने BJP पर तीखा हमला बोलते हुए दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन का जिक्र किया, जहाँ कथित तौर पर पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल हुआ था। पांडे ने कहा कि जिन लोगों ने Gen-Z को 'कॉकरोज' जैसे शब्दों से संबोधित किया, वे आज छात्र हित की बात कर रहे हैं — यह 'बहुत शर्मनाक' है। उनके अनुसार, BJP नेता और कुछ कोचिंग संचालक — जो BJP के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे — छात्रों को उकसाने और भड़काने का काम कर रहे थे।
राहुल गांधी के X पोस्ट पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए पोस्ट — जिसमें उन्होंने बल प्रयोग न होने की बात कही थी — पर प्रतिक्रिया देते हुए पांडे ने कहा कि JMM और सरकार का रुख भी यही है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग नहीं होना चाहिए — हम भी यही कहते हैं।'
पुलिसकर्मी भी हुए घायल
पांडे ने बताया कि मार्च के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें पत्थर फेंके जाते और पुलिसकर्मियों पर हमले होते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने संयम बरता और स्थिति नियंत्रण तक ही कार्रवाई सीमित रखी।
आगे क्या होगा
BJP द्वारा इस घटना को लेकर झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। JMM ने इस बंद को राजनीति से प्रेरित बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब झारखंड में छात्र आंदोलन और रोजगार के मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच यह टकराव और तीव्र हो सकता है।