झारखंड छात्र प्रदर्शन: जेएमएम के मनोज पांडे का भाजपा पर आरोप — 'कोचिंग माफिया और BJP नेता छात्रों को गुमराह कर रहे'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेता मनोज पांडे और झारखंड कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज राकेश सिन्हा ने 22 अगस्त को रांची में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों को भड़काने और गुमराह करने का काम कर रही है। दोनों नेताओं ने कहा कि छात्रों के नाम पर जो बयान सामने आ रहे हैं, वे दरअसल BJP नेताओं, छात्र संगठनों और कोचिंग माफिया की ओर से आ रहे हैं।
मनोज पांडे का आरोप: भीड़ में छात्र कम, BJP नेता अधिक
जेएमएम नेता मनोज पांडे ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के संदर्भ में कहा, 'उस भीड़ में छात्रों की संख्या बहुत कम थी। वहां BJP नेता बड़ी संख्या में मौजूद थे, साथ ही कुछ कोचिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर और माफिया भी थे। छात्रों को गुमराह करने और गलत रास्ते पर ले जाने का काम सीधे भारतीय जनता पार्टी के राज्य कार्यालय से किया जा रहा है।'
पांडे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निशाना बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट कोई आदेश देता है, तो उसके लिए एक जनप्रतिनिधि और आदिवासी मुख्यमंत्री को अपशब्द कहना लोकतंत्र के खिलाफ है।
JPSC और JSSC परीक्षा रद्द — फिर कोर्ट का हस्तक्षेप
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने बताया कि झारखंड सरकार ने छात्रों के साथ तीन दौर की बैठकें कीं और उनकी माँग पर 11वीं-13वीं जेपीएससी (JPSC) तथा जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षाएं रद्द कर दीं। हालांकि, इसके बाद माननीय न्यायालय ने सरकार के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अंतरिम आदेश है और सरकार अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष रखेगी। उन्होंने छात्रों से धैर्य रखने की अपील की।
सरकार का पक्ष: अगली सुनवाई पर टिकी नज़र
मनोज पांडे के अनुसार, यह मामले की पहली सुनवाई की तारीख थी और अगली सुनवाई 15 तारीख को निर्धारित है, जिसमें सरकार अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि किसी वकील के एक बयान के आधार पर हंगामा खड़ा करना जल्दबाजी है।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। राकेश सिन्हा ने दोहराया कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है और कोर्ट की प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हुए अपना जवाब दाखिल किया जाएगा।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार JPSC और JSSC CGL परीक्षाएं रद्द करने के अपने फैसले का बचाव करेगी। छात्र संगठनों और विपक्ष दोनों की प्रतिक्रिया इस सुनवाई के नतीजे पर निर्भर करेगी।