13 अगस्त 2026
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सीजीएल रद्द करना सरकार के अधिकार में नहीं — जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे का झारखंड प्रोटेस्ट पर बड़ा बयान

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सीजीएल रद्द करना सरकार के अधिकार में नहीं — जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे का झारखंड प्रोटेस्ट पर बड़ा बयान

सारांश

जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने रांची में स्पष्ट किया कि सीजीएल परीक्षा रद्द करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। साथ ही उन्होंने छात्रों को आंदोलन के पीछे सक्रिय राजनीतिक ताकतों की मंशा पहचानने की नसीहत दी और केंद्र से पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाब माँगा।

मुख्य बातें

जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने 13 अगस्त को रांची में सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग खारिज की।
उनका तर्क: परीक्षा की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार इसे रद्द नहीं कर सकती।
सीबीआई जांच की मांग पर उन्होंने जेपीएससी और नीट घोटाले की सीबीआई जांच के नतीजों पर सवाल उठाया।
पांडे ने छात्रों को आंदोलन के पीछे सक्रिय राजनीतिक ताकतों की मंशा समझने की नसीहत दी।
केंद्रीय गृह मंत्री के सदन में अनुपस्थित रहने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाब न देने पर जेएमएम ने केंद्र को घेरा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने 13 अगस्त 2026 को रांची में सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि इस परीक्षा की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि आंदोलन के पीछे सक्रिय राजनीतिक ताकतों की मंशा को पहचानना ज़रूरी है।

सीजीएल रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर जेएमएम का रुख

मनोज पांडे ने कहा, 'छात्रों को थोड़ी संजीदगी से उन विषयों को समझना होगा कि जहां राज्य सरकार का पावर नहीं है, वो हम कैसे कर सकते हैं? सीजीएल रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है, क्योंकि उसकी मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने की थी।' उन्होंने सीबीआई जांच की मांग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संजीव मुखिया — नीट घोटाले के कथित किंगपिन — को रिहा करने वाली जांच भी सीबीआई ने ही की थी। उन्होंने जेपीएससी की पहली और दूसरी परीक्षाओं की सीबीआई जांच का हवाला देते हुए पूछा कि उसका क्या नतीजा निकला।

कदाचार के आरोप — जेएमएम की दलील

जेएमएम प्रवक्ता ने कहा कि अभी तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और न ही किसी को दोषी करार दिया गया है — केवल अनुसंधान जारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में कदाचार का दावा करना जल्दबाजी होगी। उनका सुझाव था कि यदि छात्र या भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आपत्ति है, तो वे न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

सीएम हाउस के बाहर बैरिकेडिंग पर प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री आवास के बाहर बैरिकेडिंग के सवाल पर पांडे ने कहा कि यह जिला प्रशासन का निर्णय है और सुरक्षा की आवश्यकता के अनुसार ऐसे कदम उठाए जाते हैं — यह किसी दल विशेष की नीति नहीं है। उन्होंने कहा, 'घेराव करना छात्रों का अधिकार है। लोकतंत्र में विश्वास है तो आंदोलन को भी स्वीकार करना होगा। हम आंदोलनकारी पार्टी से ही आते हैं।' हालांकि उन्होंने जोड़ा कि आंदोलन के पीछे जो राजनीतिक शक्तियां सक्रिय हैं, उनकी मंशा को छात्रों को समझना चाहिए।

भाजपा पर सीधा निशाना

पांडे ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन छात्रों को कभी 'भेड़िया', 'दहशतगर्द' और 'पाकिस्तानी' कहा गया, आज उन्हीं के लिए आंसू बहाए जा रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों पर कथित तौर पर गोलियां चलाने और एक सांसद द्वारा युवाओं को 'गटर जेनरेशन' कहे जाने का उल्लेख किया। उनका कहना था कि यह राजनीतिक दोहरापन छात्रों को समझना चाहिए।

पैलेट गन और लाठीचार्ज पर केंद्र से जवाब तलब

सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के सवाल पर पांडे ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए और दो बुनियादी सवालों — 'पैलेट गन, कील लगी लाठियां और गोली किसने चलाई?' तथा 'किसके आदेश पर?' — का जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि आदेश केंद्र का था, तो जिम्मेदारी लेनी होगी; यदि नहीं, तो स्पष्टीकरण देना होगा। यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष जवाबदेही की मांग पर अड़ा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो असली शिकायतों — परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता — को हाशिए पर धकेल देती है। पैलेट गन और केंद्रीय गृह मंत्री की अनुपस्थिति वाला सवाल सबसे तीखा है और इसका जवाब अभी तक नहीं मिला।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएमएम ने सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग क्यों खारिज की?
जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे के अनुसार, सीजीएल परीक्षा की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय कर रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार के पास इसे रद्द करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। उन्होंने छात्रों और विपक्ष को न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का सुझाव दिया।
सीबीआई जांच की मांग पर जेएमएम का क्या कहना है?
पांडे ने कहा कि सीबीआई जांच की माँग तार्किक नहीं है, क्योंकि जेपीएससी परीक्षाओं और नीट घोटाले में भी सीबीआई ने जांच की थी, लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं रहे। उनका तर्क है कि जांच एजेंसी बदलने से समस्या हल नहीं होगी।
झारखंड छात्र आंदोलन में 'बाहरी ताकतों' से जेएमएम का क्या आशय है?
जेएमएम प्रवक्ता ने सीधे तौर पर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि जो दल कभी छात्रों को 'भेड़िया' और 'दहशतगर्द' कहता था, वही आज उनके लिए आंसू बहा रहा है। उनका इशारा था कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए छात्र आंदोलन को हवा दे रही है।
पैलेट गन और लाठीचार्ज के मामले में केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए गए?
जेएमएम ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए और दो बुनियादी सवालों — पैलेट गन व कील लगी लाठियां किसने चलाईं और किसके आदेश पर — का जवाब नहीं दिया गया। पांडे ने कहा कि यदि आदेश केंद्र का था तो जिम्मेदारी लेनी होगी।
क्या झारखंड सरकार छात्र आंदोलन को गलत मानती है?
नहीं। जेएमएम प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी आंदोलन को गलत नहीं मानती और लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है। हालांकि उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे आंदोलन के पीछे सक्रिय राजनीतिक ताकतों की मंशा को समझें।
राष्ट्र प्रेस
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