जेएमएम सरकार सीबीआई जांच से क्यों डर रही है? भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की सीआईडी जांच में लीपापोती की जा रही है, और इसीलिए राज्य सरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से बच रही है। उन्होंने जेएमएम पर तानाशाही रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया।
मुख्य आरोप: सीआईडी जांच में हेरफेर
मिश्रा ने कहा कि सीआईडी जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनमें मुख्यमंत्री के अत्यंत करीबी लोग शामिल दिख रहे हैं। उनके अनुसार, 'अगर सीबीआई जांच होगी तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है।
सपा पर निशाना: लोकसभा में विरोध क्यों नहीं?
भाजपा सांसद ने समाजवादी पार्टी (सपा) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया कि अगर सपा वास्तव में छात्रों के समर्थन में है, तो उसने इस मुद्दे को लोकसभा में तख्ती और फ्लैग्स के साथ क्यों नहीं उठाया। मिश्रा ने कहा, 'सपा को इस मुद्दे को लोकसभा में उठाना चाहिए था। इसका विरोध करना चाहिए था। अगर वो जेएमएम सरकार के विरूद्ध और छात्रों के समर्थन में हैं, तो सपा को तख्ती और फ्लैग्स लेकर सदन के अंदर जिस तरह से दूसरी चीजों का विरोध करते हैं, वैसे ही इसका भी विरोध करना चाहिए था।'
अभिजीत दिपके और सीजेपी पर सवाल
मिश्रा ने अभिजीत दिपके का नाम लेते हुए कहा कि उनके एजेंडे और उनके पीछे खड़ी ताकतें सबको ज्ञात हैं। उन्होंने कहा कि यदि दिपके रांची नहीं जा सकते, तो सीजेपी (CJP) से कोई और भी जा सकता था — और यह सब 'अपना चेहरा बचाने' की कोशिश मात्र है।
कांग्रेस के रवैये पर कटाक्ष
मिश्रा ने कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल पहले सदन में चर्चा की माँग करते हैं, लेकिन जब सत्तापक्ष की बारी आती है तो शोर मचाकर चले जाते हैं। उनके अनुसार, 'ये तो कांग्रेस पार्टी का स्वभाव रहा है कि वो कहकर बार-बार अपना रुख बदलते रहते हैं।'
इस्कॉन मंदिर के ड्रेस कोड पर प्रतिक्रिया
एक अलग सवाल के जवाब में मिश्रा ने इस्कॉन मंदिर के ड्रेस कोड विवाद पर कहा कि यह उस संस्था की निजी व्यवस्था है और उन्होंने अपनी परंपराओं के अनुकूल यह निर्णय लिया है। इस मामले में वे किसी बाहरी हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं दिखे।
गौरतलब है कि रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के बाद झारखंड में बंद का ऐलान किया गया था, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचाई है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और विपक्षी दल इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।