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जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में छात्र आंदोलन हिंसक, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार को घेरा

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जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में छात्र आंदोलन हिंसक, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार को घेरा

सारांश

रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद ने उस दिन हिंसक मोड़ लिया जब अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन करने पहुँचे छात्रों पर कथित तौर पर जेएमएम कार्यकर्ताओं ने हमला किया और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार को सीधे घेरते हुए सीबीआई जाँच की माँग की।

मुख्य बातें

रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर 21 अगस्त को जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद पर छात्रों का प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदला।
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि जेएमएम कार्यकर्ताओं ने पुतला छीना और छात्राओं के साथ बदसलूकी की — इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने दो बार लाठीचार्ज किया; छात्र नेता कुणाल और रवींद्र को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए मामले की सीबीआई जाँच की माँग की।
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाने के बाद छात्रों में आक्रोश और बढ़ा।

झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर 21 अगस्त को छात्रों का विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़प में तब्दील हो गया, जब अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने पहुँचे छात्रों और कथित तौर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। इस हिंसक घटनाक्रम के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई छात्र घायल हो गए।

मुख्य घटनाक्रम

छात्र अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन के लिए एकत्र हुए थे। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने आरोप लगाया, 'हम नारे लगाते हुए पुतला जलाने आए थे। इसी बीच जेएमएम ने अपना एक आदमी भेजा और उसने आकर हमसे पुतला छीनने की कोशिश की। उसने पुतला ले जा रही लड़की के साथ बदसलूकी करने की भी कोशिश की और उसके कपड़े फाड़ दिए।'

एक अन्य प्रदर्शनकारी छात्र ने आरोप लगाया, 'हमें नहीं पता था कि जेएमएम के गुंडे भेजे गए थे। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं, लड़कियों को छुआ गया। पुलिस प्रशासन उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा है।' हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

घटना के बाद तबीयत बिगड़ने पर छात्र नेताओं कुणाल और रवींद्र को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के बाहर उनसे मिलने आए छात्रों और पुलिस के बीच फिर से झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज किया।

पुलिस का पक्ष

लालपुर थाना प्रभारी रूपेश कुमार ने कहा, 'वे जेल चौक से भी आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें बड़ी मुश्किल से वहाँ रोका गया। कई जगहों पर उन्होंने ज्वलनशील पदार्थों, पेट्रोल और अन्य चीज़ों का इस्तेमाल करके आग लगाना शुरू कर दिया।'

विपक्ष की प्रतिक्रिया

झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जेएमएम कार्यकर्ताओं ने छात्रों के साथ बदसलूकी की और उन्हें खदेड़ा।

मरांडी ने कहा, 'स्वाभाविक है कि इस वजह से बच्चे पूरी तरह से आक्रोशित और गुस्से में हैं। फिर भी, बच्चे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। और इसके बावजूद जेएमएम, हेमंत सोरेन या सरकार को कोई शर्म नहीं आ रही है। इसलिए, सरकार के गुंडे, मैं उन्हें गुंडे ही कहूँगा, लाठियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर झारखंड के बच्चे हर गाँव में लाठियाँ लेकर निकल पड़े, तो जेएमएम वालों को भागने का रास्ता भी नहीं मिलेगा।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हालाँकि छात्र गुस्से में हैं, फिर भी वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद जेएमएम के नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना और पुतले जलाना संवैधानिक अधिकार हैं।' मरांडी ने मुख्यमंत्री से माँग की कि वे अपना वादा पूरा करें और छात्रों की माँग के अनुसार मामले को सीबीआई को सौंप दें।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया। गौरतलब है कि परीक्षा पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर झारखंड में छात्रों का असंतोष लंबे समय से उबल रहा है, और यह आंदोलन उसी की परिणति है।

आगे क्या

मरांडी की सीबीआई जाँच की माँग और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच हेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में विपक्ष के आक्रामक रुख और छात्र संगठनों की अगली रणनीति इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार जाँच की माँग पर ठोस जवाब देगी या इसे भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में दफ़न होने देगी। छात्राओं के साथ कथित बदसलूकी के आरोप — अगर सत्यापित हुए — तो यह मामला परीक्षा विवाद से कहीं आगे जाएगा।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में जेपीएससी-जेएसएससी विवाद पर छात्र आंदोलन क्यों हिंसक हुआ?
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाने के बाद छात्रों में भारी आक्रोश था। 21 अगस्त को अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन के दौरान कथित तौर पर जेएमएम कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप और पुलिस के लाठीचार्ज से स्थिति हिंसक हो गई।
बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार से क्या माँग की है?
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने माँग की है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपना वादा पूरा करें और जेपीएससी-जेएसएससी मामले को सीबीआई को सौंप दें। उन्होंने जेएमएम कार्यकर्ताओं पर छात्रों के साथ बदसलूकी का आरोप भी लगाया।
छात्र नेताओं ने जेएमएम पर क्या आरोप लगाए हैं?
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने आरोप लगाया कि जेएमएम के एक कार्यकर्ता ने पुतला छीनने की कोशिश की और एक छात्रा के कपड़े फाड़ दिए। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भी छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पुलिस ने लाठीचार्ज क्यों किया?
लालपुर थाना प्रभारी रूपेश कुमार के अनुसार प्रदर्शनकारी जेल चौक से आगे बढ़ना चाहते थे और कई जगहों पर ज्वलनशील पदार्थों व पेट्रोल का इस्तेमाल कर आग लगाने लगे, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। सदर अस्पताल के बाहर भी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दोबारा लाठीचार्ज हुआ।
जेपीएससी-जेएसएससी विवाद में हाईकोर्ट की क्या भूमिका है?
झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया। छात्रों की माँग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच सीबीआई से कराई जाए।
राष्ट्र प्रेस
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