जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: रांची में छात्रों ने तोड़ा बैरिकेड, विधानसभा घेराव; बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा नेता हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
रांची में 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में उतरे हजारों छात्रों ने पुराने विधानसभा परिसर के निकट पुलिस का पहला बैरिकेड तोड़ दिया और झारखंड विधानसभा की ओर कूच कर दिया। राज्य के 24 जिलों से पहुँचे प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा, पोस्टर और बैनर थामे सड़कों पर उतरे, जिससे राजधानी में तनाव का माहौल बन गया।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह से ही बिरसा चौक, पुराने विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में छात्रों की भीड़ जमा होने लगी थी। बड़ी संख्या में छात्र रविवार की रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और अटल स्मृति वेंडर मार्केट में रुके थे। सोमवार की सुबह जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाया गया पहला बैरिकेड पार कर लिया। प्रशासन ने विधानसभा और उसके आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया है तथा कई स्थानों पर कंटीले तार और बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है।
छात्रों की माँगें
आंदोलनरत छात्र मुख्य रूप से तीन माँगें लेकर सड़क पर उतरे हैं — 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शी सुधार, और पूरे मामले की सीबीआई जाँच। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने छात्रों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की है। गौरतलब है कि रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही, जिसके बाद छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया था।
भाजपा नेताओं की हिरासत
छात्र आंदोलन के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी झारखंड सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता में भाजपा विधायकों की बैठक के बाद पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े। करीब सुबह 9.45 बजे भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में बाबूलाल मरांडी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू और कई विधायक शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन का रुख
राजधानी रांची में सुरक्षा के असाधारण इंतजाम किए गए हैं। विधानसभा परिसर के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात है और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों को विधानसभा परिसर के भीतर प्रवेश से रोकना है, जबकि छात्र अपनी माँगों पर अडिग हैं। पहला बैरिकेड टूटने के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का असंतोष लंबे समय से उबल रहा है। तीन दौर की वार्ता के विफल होने के बाद अब दोनों पक्षों के बीच गतिरोध गहरा गया है। राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया और प्रशासन के साथ छात्र प्रतिनिधियों की संभावित बातचीत पर सबकी नजरें टिकी हैं।