10 अगस्त 2026
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रांची में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन: 10 बैरिकेड तोड़े, वाटर कैनन-लाठीचार्ज के बावजूद विधानसभा मार्च

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रांची में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन: 10 बैरिकेड तोड़े, वाटर कैनन-लाठीचार्ज के बावजूद विधानसभा मार्च

सारांश

झारखंड में 26 साल के इतिहास का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन — रांची में हजारों प्रदर्शनकारियों ने 10 से अधिक बैरिकेड तोड़े, वाटर कैनन और लाठीचार्ज झेला, और पालकी में नेता को लेकर विधानसभा की ओर बढ़े। जेपीएससी-जेएसएससी का यह आक्रोश अब सड़क पर है।

मुख्य बातें

10 अगस्त 2026 को रांची में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती विवाद के विरोध में हजारों छात्रों ने विधानसभा मार्च निकाला।
प्रशासन के 10 से अधिक बैरिकेड एक-एक कर ध्वस्त हुए; वाटर कैनन , आंसू गैस और लाठीचार्ज भी भीड़ को नहीं रोक सका।
नौ दिनों से अनशनरत जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो को समर्थक कपड़े-डंडे की पालकी में बैठाकर विधानसभा की ओर ले गए।
प्रदर्शनकारियों में स्पाइडरमैन व वनमानुष वेशभूषा, तिरंगा, पोस्टर-बैनर और फिल्मी किरदारों की झलक — विरोध के अनोखे रंग दिखे।
पूरे घटनाक्रम पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।

झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं के विरोध में हजारों छात्रों ने विधानसभा मार्च निकाला — जिसे राज्य के 26 वर्षों के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जुटे प्रदर्शनकारी तिरंगा थामे निकले और प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 से अधिक बैरिकेड एक-एक कर ध्वस्त करते आगे बढ़ते रहे।

मुख्य घटनाक्रम

पुरानी विधानसभा से मौजूदा विधानसभा तक का रास्ता प्रशासन ने बैरिकेडिंग की कई परतों से बंद कर रखा था। छात्रों को रोकने के लिए वाटर कैनन की तेज बौछारें छोड़ी गईं, आंसू गैस के गोले दागे गए और स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज भी हुआ। इसके बावजूद आठवीं बैरिकेडिंग तक पहुँचते-पहुँचते सुरक्षा घेरा कई जगह टूट चुका था। जब मुख्य सड़क पर पुलिस का घेरा मजबूत रहा, तो छात्रों के कई समूह खेतों, कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे।

देवेंद्र नाथ महतो की पालकी यात्रा

नौ दिनों से अनशन पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो इस आंदोलन की एक विशेष तस्वीर बने। सुबह जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर रहे महतो जब विधानसभा की ओर निकले तो एंबुलेंस से जगन्नाथपुर मंदिर तक पहुँचे, जहाँ पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद समर्थकों ने कपड़े और डंडे से पालकी बनाई और उन्हें उसी में बैठाकर विधानसभा की ओर बढ़े। महतो के हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर थी।

विरोध के अनोखे रंग

इस आंदोलन में प्रतिरोध दर्ज कराने के तरीके भी अलग-अलग रहे। किसी के हाथ में तिरंगा था, कोई पोस्टर और बैनर लेकर आया था। कुछ प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में नजर आए, जिनके हाथों में विरोध के संदेश लिखे थे। भीड़ में फिल्म 'पुष्पा' के किरदार की भी झलक दिखी। पूरे घटनाक्रम पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।

आंदोलन का व्यापक संदर्भ

यह आंदोलन झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की माँग को लेकर उपजे असंतोष का विस्फोट है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल पहले से उठते रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले छात्र संगठन छोटे-छोटे प्रदर्शन करते रहे थे, लेकिन इस पैमाने का सामूहिक मार्च राज्य गठन के बाद पहली बार देखा गया।

आगे की राह

आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए राज्य सरकार पर छात्रों की माँगों पर विचार करने का दबाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी राज्य सरकार की प्रतिक्रिया अब तक प्रतीक्षा-आधारित रही है। नौ दिन के अनशनरत नेता को पालकी में उठाकर चलना — यह दृश्य राज्य की संस्थागत विफलता का प्रतीक है। सवाल यह है कि क्या सरकार इस आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर दबाएगी, या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग पर ठोस जवाब देगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में छात्र आंदोलन किस मुद्दे पर हुआ?
यह आंदोलन झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की माँग को लेकर हुआ। 10 अगस्त 2026 को हजारों छात्रों ने रांची में विधानसभा मार्च निकाला।
देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और उनकी पालकी यात्रा क्यों चर्चा में है?
देवेंद्र नाथ महतो जेएलकेएम (झारखंड लोक क्रांति मोर्चा) के नेता हैं, जो नौ दिनों से अनशन पर थे। जब पुलिस ने उन्हें जगन्नाथपुर मंदिर के पास रोका, तो समर्थकों ने कपड़े और डंडे से पालकी बनाकर उन्हें उसमें बैठाकर विधानसभा की ओर मार्च किया — यह दृश्य आंदोलन का प्रतीक बन गया।
प्रशासन ने छात्रों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
प्रशासन ने पुरानी विधानसभा से मौजूदा विधानसभा तक 10 से अधिक बैरिकेड लगाए। छात्रों पर वाटर कैनन की बौछारें छोड़ी गईं, आंसू गैस के गोले दागे गए और स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज भी हुआ, लेकिन भीड़ को रोकना संभव नहीं हो सका।
यह आंदोलन झारखंड के इतिहास में क्यों अभूतपूर्व माना जा रहा है?
राज्य गठन के 26 वर्षों में इस पैमाने का छात्र आंदोलन पहली बार देखा गया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हजारों छात्र एकजुट हुए और सुरक्षा बलों की तमाम कोशिशों के बावजूद विधानसभा की ओर बढ़ते रहे।
आंदोलन में विरोध के कौन-से अनोखे तरीके देखे गए?
प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा, पोस्टर और बैनर के साथ-साथ स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में भी विरोध दर्ज कराया। भीड़ में फिल्म 'पुष्पा' के किरदार की झलक भी दिखी। पूरे घटनाक्रम पर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।
राष्ट्र प्रेस
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