रांची में JPSC-JSSC धांधली के खिलाफ 7 घंटे से सड़क पर हजारों छात्र, लाठीचार्ज-आंसू गैस के बाद भी डटे
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन 10 अगस्त को अपने 18वें दिन और अधिक उग्र हो गया। सोमवार सुबह 9 बजे से विधानसभा मार्च के लिए एकत्रित हुए हजारों छात्र शाम 4 बजे के बाद भी अपनी जगह से नहीं हिले — वाटर कैनन, आंसू गैस के छह गोलों और लाठीचार्ज के बावजूद उनका हौसला बरकरार रहा।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी छात्र सुरक्षा के बहुस्तरीय घेरे को पार करते हुए दोपहर 2 बजे तक नए विधानसभा भवन से महज 200 मीटर की दूरी तक पहुँच गए। बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ते छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, फिर आंसू गैस के छह गोले दागे और अंततः लाठीचार्ज किया।
जगन्नाथपुर मंदिर के पीछे उग्र छात्रों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत हुई, जहाँ पथराव और जूते-चप्पल फेंके जाने के जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया। इस टकराव में एक छात्र के सिर पर गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा; कई अन्य छात्र तथा पुलिसकर्मी भी घायल हुए। एक घायल पुलिसकर्मी को तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल पहुँचाया गया।
विधानसभा की कार्यवाही पर असर
आंदोलन की आँच में झारखंड विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को विपक्ष की गैरमौजूदगी में चली। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह ऐसे समय में हुआ जब सड़कों पर हजारों की भीड़ अपनी माँगों पर अड़ी हुई थी।
जेएलकेएम विधायक की मध्यस्थता
इस बेहद संवेदनशील मोड़ पर जेएलकेएम (JLKM) विधायक जयराम महतो घटनास्थल पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। उनके समझाने के बाद छात्र सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी जारी रखी। हालाँकि, गतिरोध बरकरार रहा और आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश करता दिखा।
छात्रों की मुख्य माँगें
आंदोलनकारी जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) समेत विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, चयन प्रक्रिया में पारदर्शी सुधार और पूरे भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच की माँग पर अडिग हैं। गौरतलब है कि यह आंदोलन 18 दिनों से अनवरत जारी है, जो इसे झारखंड के हालिया इतिहास में छात्रों के सबसे लंबे सड़क आंदोलनों में से एक बनाता है।
आगे क्या
विधानसभा के मुहाने पर डटे छात्र अब अलग-अलग समूहों में बँटकर विधायक आवास (एमएलए हॉस्टल) की ओर बढ़ने लगे हैं। पुलिस और प्रशासन इन्हें रोकने में लगे हैं। यह आंदोलन तब तक थमता नहीं दिख रहा जब तक सरकार की ओर से ठोस आश्वासन या कार्रवाई नहीं होती।