झारखंड JPSC-JSSC आंदोलन: 8 बैरिकेड तोड़े, वाटर कैनन के बाद भी डटे छात्र; देवेंद्र नाथ महतो को कंधों पर उठाकर विधानसभा पहुंचाया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में 10 अगस्त 2026 को छात्रों का आंदोलन उग्र रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक आठ बैरिकेड तोड़ते हुए झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रशासन के वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद छात्र पीछे नहीं हटे और कच्चे-पहाड़ी रास्तों से आगे बढ़ते रहे।
देवेंद्र नाथ महतो को कंधों पर उठाकर पहुंचाया
जयपाल सिंह स्टेडियम में नौ दिनों से अनशन पर बैठे जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो को समर्थकों ने कपड़े और डंडे से बनी पालकी में कंधों पर उठाकर विधानसभा के निकट पहुंचाया। एंबुलेंस से जाते समय जगन्नाथपुर मंदिर के पास उन्हें प्रशासन ने रोक दिया था, जिसके बाद समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। इस दौरान महतो के हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी थी।
विधायक का आंदोलन स्थल पर पहुंचना
सदन की कार्यवाही में भाग लेने के बाद जेएलकेएम के विधायक भी आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से विधानसभा के गेट तक न जाने और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने की अपील की। विधायक ने कहा कि आंदोलन की गरिमा बनाए रखना ज़रूरी है।
मुख्य घटनाक्रम
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मोर्चा के स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने में लगे रहे। प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से जगन्नाथ मंदिर तक मार्च कर वहीं धरना देने को कहा। भीड़ और प्रतिनिधिमंडल के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में तीन स्तर की मानव श्रृंखला बनाई गई और छात्र सड़क पर बैठ गए। वंदे मातरम, भारत माता की जय और जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे।
प्रशासन ने मुख्य सड़क पर सुरक्षा घेरा मजबूत रखा, जिसके चलते कई छात्र कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़े। कुछ स्थानों पर छात्रों ने बैरिकेड खींचकर हटा दिए। प्रदर्शन की ड्रोन से रिकॉर्डिंग भी की गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
आंदोलन का अनोखा रंग
विरोध प्रदर्शन में अनूठा रंग भी दिखा — कुछ प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में पहुंचे, हाथों में संदेश लिखे थे। भीड़ में फिल्म 'पुष्पा' के किरदार की झलक भी दिखाई दी। यह आंदोलन अब विधानसभा के आसपास के इलाकों तक फैल चुका है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह आंदोलन झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग को लेकर लंबे समय से चल रहा है। छात्र अपनी माँगों पर अडिग हैं और प्रशासन उन्हें विधानसभा परिसर के निकट पहुंचने से रोकने में जुटा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और वार्ता की दिशा इस आंदोलन का भविष्य तय करेगी।