झारखंड विधानसभा घेराव: 10 घंटे बाद लाठीचार्ज, देवेंद्र नाथ महतो को एंबुलेंस से उठाया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में सोमवार, 10 अगस्त को छात्रों ने झारखंड विधानसभा का करीब दस घंटे तक घेराव किया। शाम सात बजे पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन के बल पर विधानसभा के बाहर की सड़क खाली कराई। नौ दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को पुलिस जबरन एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल से ले गई।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह करीब नौ बजे पुराने विधानसभा परिसर के निकट जुटे छात्रों ने दिनभर कई स्तरों की बैरिकेडिंग तोड़ी। शाम करीब चार बजे अंतिम बैरिकेडिंग भी पार कर ली गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा के गेट और आसपास की सड़कों पर पहुँच गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर टकराव हुआ। पुलिस ने वाटर कैनन, आँसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव की भी खबर सामने आई। इस दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए।
देवेंद्र नाथ महतो की स्थिति
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो नौ दिनों की भूख हड़ताल के बावजूद सोमवार को एंबुलेंस और स्ट्रेचर के जरिए प्रदर्शन स्थल तक पहुँचे थे। पुलिस ने उन्हें जबरन एंबुलेंस में बिठाकर वहाँ से हटाया। महतो ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होगा और इसका असर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी पड़ सकता है।
छात्रों की मांगें
आंदोलनकारी छात्र मुख्यतः तीन माँगें रख रहे हैं — 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा सहित विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करना, और पूरे भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कराना। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी वार्ता के लिए सीधे मुख्यमंत्री से बात होगी।
वार्ता विफल, आंदोलन जारी
रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद सोमवार के घेराव का कार्यक्रम तय किया गया था। शाम सात बजे सड़क खाली होने के बावजूद आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सैकड़ों छात्र विधानसभा से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर अलग-अलग समूहों में जमा हैं और नारेबाजी जारी है।
आगे क्या
छात्र नेताओं ने संकेत दिया है कि जब तक मुख्यमंत्री स्तर पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। यह आंदोलन झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर बढ़ते असंतोष की बड़ी अभिव्यक्ति है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं।