18 अगस्त 2026
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झारखंड छात्र आंदोलन: देवेंद्र नाथ महतो की 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त, JSSC-CGL परीक्षा रद्द

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झारखंड छात्र आंदोलन: देवेंद्र नाथ महतो की 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त, JSSC-CGL परीक्षा रद्द

सारांश

16 दिन की भूख हड़ताल, एक सरकारी घोषणा और देर रात अस्पताल पहुँचे मंत्री — झारखंड के छात्र आंदोलन का यह अंत उतना ही नाटकीय था जितना इसकी शुरुआत। JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएँ रद्द हुईं, और देवेंद्र महतो ने सम्मान के साथ अनशन तोड़ा।

मुख्य बातें

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 18 अगस्त 2026 को 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाएँ रद्द करने की घोषणा सरकार ने की।
मंत्री दीपिका पांडे सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी देर रात रांची सदर अस्पताल पहुँचे और अनशन समाप्त कराया।
प्रदर्शनकारी हबीबा और राहुल का अनशन भी उसी रात खत्म हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री अंसारी ने फैसले का श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिया।

रांची में 18 अगस्त 2026 की देर रात झारखंड सरकार के मंत्रियों दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी ने रांची सदर अस्पताल पहुँचकर 16 दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई। यह कदम जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की सरकारी घोषणा के तुरंत बाद उठाया गया। प्रदर्शनकारी हबीबा और राहुल का अनशन भी उसी रात समाप्त कराया गया।

मुख्य घटनाक्रम

अनशन समाप्त करने के बाद देवेंद्र महतो ने मीडिया से कहा, 'आज, हमारी भूख हड़ताल के 16वें दिन, हमने सम्मानजनक तरीके से अपना अनशन खत्म किया। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडे और विधायक जयराम महतो की संयुक्त पहल से हमने यह फैसला किया। जिन मांगों के लिए हम संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, वे सभी पूरी हो गई हैं।' अनशन समाप्ति के बाद महतो अस्पताल से सीधे अपने घर चले गए।

गौरतलब है कि यह आंदोलन जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले चल रहा था, जिसमें परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और कथित अनियमितताओं को लेकर जाँच की माँग की जा रही थी।

प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया

प्रदर्शनकारी हबीबा ने सरकार की सराहना करते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने साबित कर दिया है कि यह आदिवासियों, मूलवासियों और सदनों की सरकार है और यह उनके हितों के बारे में सोचती है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर हेमंत हैं, तो हिम्मत है।' जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को 'ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय' बताते हुए मुख्यमंत्री और सरकार का धन्यवाद किया।

सरकार की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया कि देवेंद्र महतो, हबीबा और राहुल ने स्वेच्छा से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला किया, जिसके बाद उन्हें जूस पिलाया गया। अंसारी ने इस फैसले का श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दिया। उन्होंने कहा, 'यह मुख्यमंत्री का एक ऐतिहासिक निर्णय था। राहुल गांधी ने हमें निर्देश दिया और एक पत्र लिखा, जिसके बाद सरकार ने युवाओं की मांगों को स्वीकार कर लिया।'

अंसारी ने यह भी कहा, 'सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग बहुत कठिन थी और आमतौर पर कोई भी सरकार ऐसी मांग को नहीं मानती। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बहुत उदारता दिखाई।'

मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे के प्रति शुरू से संवेदनशील रही है और मुख्यमंत्री छात्रों के आंदोलन पर बारीकी से नज़र रखे हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लगातार छात्रों के हितों के समर्थन में आवाज़ उठाई।

आम जनता और छात्रों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय हज़ारों उन अभ्यर्थियों को प्रभावित करेगा जो इन परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं। हालाँकि, छात्र संगठनों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना दीर्घकालिक दृष्टि से ज़रूरी था।

क्या होगा आगे

सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रद्द की गई परीक्षाएँ दोबारा कब और किस एजेंसी के माध्यम से आयोजित की जाएँगी। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने संकेत दिया है कि वे सुधारों के क्रियान्वयन पर नज़र रखेंगे। यह आंदोलन झारखंड में छात्र राजनीति और सरकारी जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं की जगह कौन-सी पारदर्शी व्यवस्था आएगी और कब। परीक्षा रद्द करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि शुरुआत है — हज़ारों अभ्यर्थियों का भविष्य अभी भी अधर में है। इरफान अंसारी का श्रेय-वितरण राजनीतिक है, लेकिन यह भी सच है कि बिना ठोस सुधार ढाँचे के, यह आंदोलन कुछ महीनों में फिर सिर उठा सकता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल क्यों शुरू हुई थी?
देवेंद्र नाथ महतो और अन्य छात्र नेता जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा तथा टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग को लेकर अनशन पर बैठे थे। यह आंदोलन जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले चलाया जा रहा था।
भूख हड़ताल कितने दिन चली और कैसे समाप्त हुई?
भूख हड़ताल 16 दिनों तक चली और 18 अगस्त 2026 की देर रात रांची सदर अस्पताल में समाप्त हुई। झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी ने वहाँ पहुँचकर देवेंद्र महतो, हबीबा और राहुल को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने से कौन प्रभावित होगा?
जेएसएससी-सीजीएल और टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल हो चुके हज़ारों अभ्यर्थी इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे। सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये परीक्षाएँ दोबारा कब और किस एजेंसी के ज़रिये आयोजित की जाएँगी।
इस फैसले में राहुल गांधी की क्या भूमिका बताई गई है?
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार को निर्देश दिया और एक पत्र लिखा, जिसके बाद सरकार ने छात्रों की मांगें स्वीकार कीं। मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने भी कहा कि राहुल गांधी लगातार छात्रों के हितों के समर्थन में बोलते रहे।
झारखंड में आगे परीक्षा सुधार की क्या संभावना है?
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने संकेत दिया है कि वे सुधारों के क्रियान्वयन पर नज़र रखेंगे। सरकार ने अभी तक नई परीक्षा एजेंसी या प्रक्रिया की घोषणा नहीं की है, जो आने वाले समय में अभ्यर्थियों के लिए अनिश्चितता बनाए हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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