झारखंड में JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएँ रद्द: प्रवीण खंडेलवाल बोले, छात्रों की अनसुलझी चिंताओं पर हो संवाद
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद 18 अगस्त को देशभर के राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं। सरकार के इस निर्णय को व्यापक रूप से छात्र आंदोलन की जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने घोषणा के बाद देर रात अपना अनशन समाप्त किया।
भाजपा का रुख: बातचीत से समाधान ज़रूरी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, "झारखंड सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के साथ-साथ छात्रों को शांत करना भी ज़रूरी है। अगर उनकी कुछ चिंताएँ अभी अनसुलझी हैं, तो झारखंड सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।"
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि संवाद के ज़रिए छात्रों के मुद्दों का समाधान किया जाए ताकि आंदोलन दोबारा न भड़के और परीक्षा प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: आंदोलन समाप्त, सहयोग का संकल्प
लखनऊ से कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि वे अब सरकार का सहयोग करेंगे और आंदोलन समाप्त हो चुका है। राजपूत के अनुसार, सरकार ने छात्रों की प्रमुख माँगें स्वीकार कर ली हैं।
उन्होंने आगे बताया कि महतो ने सरकार के साथ मिलकर एक ऐसी मज़बूत व्यवस्था बनाने की बात कही है जिससे भविष्य में परीक्षाओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
समाजवादी पार्टी की माँग: ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर स्थायी प्रतिबंध
समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि सभी टीडीपीएल परीक्षाएँ पहले ही रद्द की जा चुकी हैं और जेपीएससी 2023-24 तथा बैकलॉग परीक्षाएँ भी रद्द कर दी गई हैं।
वर्मा ने तीखा सवाल उठाया — "चाहे NTA हो, राज्य सरकार की परीक्षा एजेंसियाँ हों या परीक्षा प्राधिकरण, अगर किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया है तो जब तक वह अपना नाम साफ़ नहीं कर लेती, उसे परीक्षा के पेपर छापने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?"
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करने की माँग की।
पृष्ठभूमि: पेपर लीक और 16 दिन का अनशन
झारखंड में पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र लंबे समय से धरने पर बैठे थे और कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी थे। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं — NTA विवाद उसी की एक कड़ी है।
गौरतलब है कि सरकार की घोषणा के बाद 16 दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने देर रात अपनी भूख हड़ताल समाप्त की — जो इस आंदोलन का सबसे प्रतीकात्मक क्षण रहा।
आगे की राह
अब सवाल यह है कि झारखंड सरकार रद्द परीक्षाओं के स्थान पर नई परीक्षाएँ किस एजेंसी के माध्यम से और किस समय-सीमा में कराएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी चयन प्रक्रिया और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के बिना छात्रों का भरोसा दोबारा हासिल करना कठिन होगा।