झारखंड में JSSC परीक्षाएं रद्द: भूख हड़ताल खत्म, देवेंद्र नाथ महतो ने की लीकमुक्त परीक्षा कानून की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की सरकारी घोषणा के बाद 18 अगस्त 2026 को आंदोलनरत छात्रों ने अपनी 16 दिनों से चली आ रही भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है — अब आंदोलन का लक्ष्य एक ऐसा कानून बनवाना है जो राज्य में भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को पूरी तरह रोके।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में JSSC-CGL और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया। इस घोषणा के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम, रांची में 24 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों में जश्न का माहौल बन गया। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को गले लगाया, मिठाइयां बांटीं और आतिशबाजी के साथ इस जीत का उत्सव मनाया।
छात्र नेता की मांग — आंदोलन का दूसरा चरण
भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, 'कल रद्द हुई सीजीएल परीक्षा 28 जनवरी 2024 को भी पेपर लीक के कारण रद्द हुई थी। पुनर्परीक्षा के दौरान भी पेपर लीक हुआ, जिसके कारण परीक्षा दोबारा रद्द करनी पड़ी। अब तक रद्द हुई 14 परीक्षाओं के मामले में क्या गारंटी है कि पेपर लीक की घटनाएं दोबारा नहीं होंगी?' उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद सिर्फ कुछ खास परीक्षाओं को रद्द करवाना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।
महतो ने आगे कहा, 'सरकार को अब ऐसी प्रणाली की गारंटी देनी चाहिए जिसमें भविष्य में पेपर लीक, प्रश्न पत्र तैयार करने में गड़बड़ी या परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की धांधली की कोई गुंजाइश न हो। इस संबंध में राज्य विधानसभा द्वारा कानून पारित किया जाना चाहिए। अगर जरूरत हो, तो इस मकसद को हासिल करने के लिए संविधान में संशोधन भी किया जा सकता है।'
सरकार और मंत्रियों की भूमिका
भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडे और विधायक जयराम महतो की संयुक्त पहल के बाद लिया गया। महतो ने कहा कि जिन मांगों के लिए वे संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, वे सभी पूरी हो गई हैं और इसके लिए वे सरकार, छात्रों और अपने समर्थकों का धन्यवाद करते हैं।
आम जनता और छात्रों पर असर
गौरतलब है कि परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा झारखंड राज्य बनने के समय से ही होती आ रही है, लेकिन छात्रों को अब तक न्याय नहीं मिला है — यह आरोप महतो ने लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है। महतो का कहना है कि यदि ऐसा कानून बनता है, तो इससे न केवल मौजूदा पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी फायदा होगा।
क्या होगा आगे
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का दूसरा चरण अब विधानसभा में लीकमुक्त परीक्षा कानून पारित कराने के लिए दबाव बनाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन फिर से तेज किया जा सकता है। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता अब राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन चुकी है।