3 अक्टूबर 2026
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गांधी जयंती पर संयुक्त राष्ट्र में राजनयिकों ने किया अहिंसा के संदेश को याद, वैश्विक प्रासंगिकता पर दिया जोर

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गांधी जयंती पर संयुक्त राष्ट्र में राजनयिकों ने किया अहिंसा के संदेश को याद, वैश्विक प्रासंगिकता पर दिया जोर

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में गांधी जयंती पर मोरक्को, उरुग्वे और भारत के राजनयिकों ने अहिंसा की ताकत को आज के संघर्षों से जोड़ा। भारत ने घायल पायलट स्मित मच्छार का उदाहरण देकर बताया कि गांधी के सिद्धांत आज भी ज़िंदा हैं।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र में 2 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर महात्मा गांधी की जयंती मनाई गई।
मोरक्को के प्रतिनिधि उमर हिलाले ने अहिंसा को 'सक्रिय शक्ति' बताया जो अनुशासन और साहस की माँग करती है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने घायल पायलट स्मित मच्छार का उदाहरण देते हुए गांधीवादी अहिंसा को आज के दौर से जोड़ा।
उरुग्वे की प्रतिनिधि लौरा डुप्यू लासेरे ने लातिन अमेरिका में तानाशाही के खिलाफ गांधी के संदेश की प्रासंगिकता बताई।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 में 141 देशों के प्रस्ताव पर 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया था।

संयुक्त राष्ट्र में 2 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के अवसर पर दुनिया भर के राजनयिकों ने महात्मा गांधी की जयंती पर उनके अहिंसा के संदेश को याद किया और समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने बताया कि गांधी के सिद्धांत उनके अपने-अपने क्षेत्रों में आज भी किस तरह गूंजते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मोरक्को के संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधि उमर हिलाले ने इस स्मृति कार्यक्रम में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उनके जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाकर उनकी विरासत को सभी लोगों के लिए एक साझा धरोहर बनाने का फैसला किया है।' उन्होंने कहा, 'उनकी समझ में, अहिंसा एक सक्रिय शक्ति है — यह अनुशासन, साहस और दूसरे की मानवता में अटूट विश्वास की माँग करती है।'

हिलाले ने यह भी रेखांकित किया कि मोरक्को में राजा मोहम्मद छठे ने सदैव संयम, सहिष्णुता और शांतिपूर्ण संवाद के मार्ग को अपनाया है, जहाँ विभिन्न धर्म और संस्कृतियाँ मिलजुलकर रहती हैं।

भारत का दृष्टिकोण: गांधीवाद का समकालीन उदाहरण

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गांधीवादी सिद्धांतों के एक ताज़े उदाहरण का उल्लेख किया — घायल पायलट स्मित मच्छार का, जिन्होंने फ्लाईदुबई एयरलाइंस की उड़ान में अहिंसक साहस के ज़रिए यात्रियों की जान बचाई। हरीश ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पायलट 'अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा प्रतीक' हैं।

मोदी के शब्दों को उद्धृत करते हुए हरीश ने बताया कि पायलट ने हमले के बावजूद 'न केवल इसे सहन किया, बल्कि बहादुरी और साहस दिखाते हुए यह सुनिश्चित किया कि उड़ान सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचे और उनकी जिम्मेदारी में सभी यात्री सुरक्षित रहें।' गौरतलब है कि चाकू से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाज़ा खोल दिया ताकि यात्री उस सह-पायलट पर काबू पा सकें, जिसने आतंकी अपहरण की कोशिश में उन पर हमला किया था।

कार्यक्रम से पूर्व हरीश ने संयुक्त राष्ट्र परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

लातिन अमेरिका में गांधी का प्रभाव

उरुग्वे की संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधि लौरा डुप्यू लासेरे ने बताया कि गांधी का संदेश दक्षिण अमेरिका में किस तरह आत्मसात किया गया। उन्होंने कहा कि यह संदेश 'अर्जेंटीना और उरुग्वे में तानाशाही के दौर में भी प्रासंगिक रहा, जब दादियाँ अपने जबरन गायब किए गए बच्चों और पोते-पोतियों की तलाश में मानवीय संकट से जूझ रही थीं।'

जी77 की पूर्व अध्यक्ष लासेरे ने जोड़ा, 'गांधी ने दिखाया कि अहिंसा कमज़ोरी या निष्क्रियता का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस की अभिव्यक्ति है।' यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब दुनिया के कई हिस्सों में सशस्त्र संघर्ष और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएँ जारी हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 में 141 देशों द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव के ज़रिए 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया था। यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि गांधी के विचारों को वैश्विक स्तर पर किस व्यापकता से स्वीकार किया गया है। यह दिन हर वर्ष संघर्ष-ग्रस्त दुनिया को शांति और संवाद का स्मरण कराता है।

क्या होगा आगे

इस वार्षिक कार्यक्रम की परंपरा भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है, और राजनयिक समुदाय की यह भागीदारी संकेत देती है कि गांधीवादी कूटनीति — जो संवाद और अहिंसा को केंद्र में रखती है — को बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बल मिल रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस वर्ष भारत का दृष्टिकोण उल्लेखनीय रहा — एक जीवित समकालीन उदाहरण के ज़रिए अहिंसा को परिभाषित करना महज़ दार्शनिक भाषणबाज़ी से अलग था। फिर भी सवाल उठता है कि जब संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश खुद युद्धों में उलझे हों, तो इन वार्षिक स्मृति कार्यक्रमों का व्यावहारिक असर क्या है? गांधी की विरासत को प्रतीकात्मकता से आगे ले जाने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं को ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं की ज़रूरत है, जो अभी भी अनुपस्थित दिखती हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस क्या है और यह कब से मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस हर वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 में 141 देशों द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव के ज़रिए इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया था।
संयुक्त राष्ट्र में 2 अक्टूबर 2026 के कार्यक्रम में किन देशों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में मोरक्को, भारत और उरुग्वे समेत कई देशों के स्थायी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मोरक्को के उमर हिलाले, भारत के पी. हरीश और उरुग्वे की लौरा डुप्यू लासेरे ने गांधी के संदेश पर अपने विचार रखे।
पायलट स्मित मच्छार का गांधी जयंती से क्या संबंध है?
भारत के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि पी. हरीश ने गांधीवादी अहिंसा के समकालीन उदाहरण के रूप में फ्लाईदुबई के घायल पायलट स्मित मच्छार का उल्लेख किया। मच्छार ने चाकू से घायल होने के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित बचाया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 'अहिंसा के सिद्धांत का सच्चा प्रतीक' कहा था।
लातिन अमेरिका में गांधी के संदेश की क्या प्रासंगिकता रही?
उरुग्वे की प्रतिनिधि लौरा डुप्यू लासेरे के अनुसार, अर्जेंटीना और उरुग्वे में तानाशाही के दौर में माताओं और दादियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर गांधी के संदेश को अपनाया। उन्होंने अपने जबरन गायब किए गए प्रियजनों की तलाश और मानवाधिकारों की वकालत के लिए अहिंसक मार्ग चुना।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने गांधी जयंती पर क्या किया?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कार्यक्रम से पूर्व संयुक्त राष्ट्र परिसर में गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने स्मृति कार्यक्रम में गांधीवादी सिद्धांतों के व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए।
राष्ट्र प्रेस
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