गांधी जयंती 2026: 157वीं जयंती पर विदेशी राजदूतों ने बापू को नमन, सत्य-अहिंसा को बताया आज भी प्रासंगिक
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर भारत में तैनात विदेशी राजनयिकों और दूतावासों ने बापू की विरासत को याद करते हुए उनके सत्य, अहिंसा और मानवीय गरिमा के संदेश को आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक बताया। नॉर्वे, जर्मनी, फ्रांस, यूक्रेन समेत कई देशों के दूतावासों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजदूतों के व्यक्तिगत अनुभव और संदेश
भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने एक्स पर साबरमती आश्रम की अपनी यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए लिखा, 'गांधी जयंती की शुभकामनाएं! साबरमती आश्रम की यात्रा मेरे लिए एक बहुत ही मार्मिक अनुभव था। सत्य, अहिंसा और शांति ऐसे मूल्य हैं, जिन्हें हम नॉर्वे में भी संजोते हैं। गांधीजी का संदेश हम सबको आज भी प्रेरणा देते हैं।'
जर्मनी के राजदूत जैस्पर विक ने 2019 में साबरमती आश्रम की अपनी यात्रा की यादों को ताज़ा करते हुए पोस्ट किया, 'आज जब हम महात्मा गांधी का जन्मदिन मना रहे हैं, तो मुझे 2019 में साबरमती आश्रम की अपनी यात्रा की सुखद यादें ताजा हो आती हैं। गांधी जयंती हमें गांधीजी के अहिंसा और मानवीय गरिमा के प्रति सम्मान के संदेश की याद दिलाती है। ऐसे मूल्य जो आज भी पूरी दुनिया में उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे।'
फ्रांस और यूक्रेन दूतावास की श्रद्धांजलि
भारत में फ्रांस के दूतावास ने एक्स पर लिखा कि नई दिल्ली के 'ग्यारह मूर्ति' से लेकर स्ट्रासबर्ग में उनकी प्रतिमा तक, गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश सीमाओं के पार तक फैला हुआ है। दूतावास ने कहा कि फ्रांस स्मारक डाक टिकट और कांस्य प्रतिमा के ज़रिए गांधीजी की याद को सम्मान देता है।
यूक्रेनी दूतावास ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए भारतीय नागरिकों को गांधी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवीय गरिमा के शाश्वत सिद्धांत दुनिया भर की पीढ़ियों को प्रेरित करते रहें तथा न्याय, स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित शांति को मजबूत करें। यह उल्लेखनीय है कि यूक्रेन एक सक्रिय संघर्ष की स्थिति में होने के बावजूद अहिंसा के इस संदेश को प्रासंगिक मानता है।
बीजिंग में जिंताई आर्ट म्यूजियम में आयोजन
चीन में भारतीय दूतावास ने भारतीय समुदाय और 'फ्रेंड्स ऑफ इंडिया' के साथ मिलकर बीजिंग के जिंताई आर्ट म्यूजियम में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मनाई। राजदूत विक्रम दोराईस्वामी और जिंताई आर्ट म्यूजियम के क्यूरेटर मास्टर युआन ज़िकुन ने बापू को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस कार्यक्रम में चीनी कलाकारों ने भावपूर्ण संगीत प्रस्तुति दी, जबकि भारतीय समुदाय के सदस्यों ने गांधीजी के पसंदीदा भजनों का गायन किया। गौरतलब है कि हिंदी दिवस प्रतियोगिता 2026 के विजेताओं को भी इसी अवसर पर सम्मानित किया गया।
वैश्विक प्रासंगिकता और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और सामाजिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। विभिन्न देशों के राजनयिकों द्वारा गांधीजी के अहिंसा के मूल्यों को याद करना इस बात का प्रमाण है कि बापू का दर्शन आज भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक शांति की चर्चाओं में केंद्रीय स्थान रखता है। आने वाले वर्षों में भी गांधीजी की विरासत विश्व समुदाय को संवाद और सौहार्द की ओर प्रेरित करती रहेगी।