2 अक्टूबर 2026
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गांधी जयंती 2026: आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, CM नायडू और पवन कल्याण ने बापू व शास्त्री को दी श्रद्धांजलि

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गांधी जयंती 2026: आंध्र प्रदेश के राज्यपाल, CM नायडू और पवन कल्याण ने बापू व शास्त्री को दी श्रद्धांजलि

सारांश

गांधी जयंती 2026 पर आंध्र प्रदेश के तीनों शीर्ष नेताओं — राज्यपाल नजीर, CM नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण — ने एक स्वर में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को याद किया। नायडू ने 'स्वर्ण आंध्र' के सपने को गांधीवादी मार्ग से जोड़ा, जबकि पवन कल्याण ने ग्राम स्वराज और जवाबदेही पर जोर दिया।

मुख्य बातें

2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती पर अमरावती में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुए।
अब्दुल नजीर ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के प्रति पुनः समर्पण का आह्वान किया।
चंद्रबाबू नायडू ने अपने आवास पर पुष्पांजलि अर्पित की और गांधीवादी आदर्शों को स्वर्ण आंध्र के लक्ष्य से जोड़ा।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 'ग्राम स्वराज' के विजन और शास्त्री जी के 'जय जवान, जय किसान' नारे की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
2 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त है।

गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 को अमरावती में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

राज्यपाल नजीर का संदेश

राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी ने सादा जीवन जिया और 'सत्य' तथा 'अहिंसा' को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रपिता के दिखाए मार्ग पर चलते हुए इन महान सिद्धांतों के प्रति खुद को पुनः समर्पित करें। राज्यपाल ने यह भी रेखांकित किया कि गांधी जी का शांतिपूर्ण विरोध और सविनय अवज्ञा का मार्ग विश्व भर के नेताओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शास्त्री का जीवन विनम्रता, ईमानदारी, साहस और देश के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का प्रसिद्ध नारा 'जय जवान, जय किसान' देश के सैनिकों और किसानों के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है तथा आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।

मुख्यमंत्री नायडू की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अपने आवास पर दोनों नेताओं की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा, "गांधीजी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और ग्राम स्व शासन जैसे आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। देश की आज़ादी के लिए उनका त्याग और जिस तरह से उन्होंने लोगों को एकजुट किया, वह हमेशा याद रखा जाएगा।"

नायडू ने आगे कहा कि एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और गरीबी मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में काम करना ही गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने विकसित भारत और स्वर्ण आंध्र के लक्ष्य को गांधी जी के मार्ग से जोड़ते हुए प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया। लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें सादगी का प्रतीक और देशभक्ति व ईमानदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का संबोधन

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि सत्य, अहिंसा और निस्वार्थ सेवा में महात्मा गांधी के अटूट विश्वास ने देश को तब भी प्रेरित किया और आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने 'ग्राम स्वराज' के गांधीवादी विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत जमीनी स्तर से शुरू होती है।

पवन कल्याण ने लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "शास्त्री जी ने दिखाया कि सच्ची लीडरशिप के लिए दिखावे की नहीं, बल्कि मुश्किल समय में हिम्मत, सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और हर नागरिक के कल्याण के प्रति समर्पण की ज़रूरत होती है।" उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का जीवन आज की पीढ़ी के लिए ईमानदारी से जीने, विनम्रता से सेवा करने और खुद से ऊपर देश को रखने की बड़ी प्रेरणा है।

ऐतिहासिक महत्व और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को भारत में दो महान विभूतियों — महात्मा गांधी (जन्म 1869) और लाल बहादुर शास्त्री (जन्म 1904) — की जयंती एक साथ मनाई जाती है। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया है। आंध्र प्रदेश के नेताओं की यह श्रद्धांजलि ऐसे समय में आई है जब राज्य स्वर्ण आंध्र के विकास लक्ष्यों की ओर अग्रसर है, और इन महान नेताओं के आदर्शों को नीति निर्माण की दिशा से जोड़ा जा रहा है।

राज्य के तीनों शीर्ष नेताओं का एक ही दिन सार्वजनिक रूप से इन आदर्शों को दोहराना यह संकेत देता है कि राजनीतिक नेतृत्व गांधीवादी मूल्यों — सादगी, स्वच्छता, और जमीनी विकास — को अपनी प्राथमिकताओं में स्थान देना चाहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ तेलुगु देशम पार्टी और जनसेना के गठबंधन को जनता के सामने एक साझा वैचारिक आधार पेश करना है। नायडू का 'स्वर्ण आंध्र' और गांधी का 'ग्राम स्वराज' एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में प्रस्तुत किए गए, लेकिन असली कसौटी यह है कि विकेंद्रीकरण और कृषि कल्याण की नीतियाँ जमीन पर कितनी उतरती हैं। जयंती के भाषण प्रेरक होते हैं, पर गांधीवादी जवाबदेही की माँग यह है कि वादे और परिणाम के बीच की खाई को मापा जाए।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधी जयंती 2026 पर आंध्र प्रदेश में क्या हुआ?
2 अक्टूबर 2026 को अमरावती में राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री नायडू ने अपने आवास पर दोनों नेताओं की तस्वीरों पर पुष्पांजलि चढ़ाई।
पवन कल्याण ने महात्मा गांधी और शास्त्री जी के बारे में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि गांधी जी का 'ग्राम स्वराज' का विजन याद दिलाता है कि भारत की ताकत जमीनी स्तर से शुरू होती है। शास्त्री जी के बारे में उन्होंने कहा कि सच्ची लीडरशिप के लिए हिम्मत, जवाबदेही और नागरिक कल्याण के प्रति समर्पण चाहिए।
2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस क्यों मनाया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र ने महात्मा गांधी की जन्मतिथि 2 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' घोषित किया है। गांधी जी के शांतिपूर्ण विरोध और सविनय अवज्ञा के मार्ग को विश्व भर के नेताओं के लिए प्रेरणा माना जाता है।
CM नायडू ने गांधीवादी आदर्शों को 'स्वर्ण आंध्र' से कैसे जोड़ा?
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और गरीबी मुक्त समाज बनाना ही गांधीजी का सपना था। उन्होंने आह्वान किया कि विकसित भारत और स्वर्ण आंध्र के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांधी जी द्वारा दिखाए रास्ते पर चलना होगा।
'जय जवान, जय किसान' नारे का क्या महत्व है?
यह नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था, जो देश के सैनिकों और किसानों के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है। राज्यपाल नजीर, CM नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण तीनों ने इस नारे का उल्लेख करते हुए शास्त्री जी की विरासत को आज भी प्रासंगिक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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