गांधी जयंती 2026: राहुल गांधी ने राजघाट पर बापू को नमन, बोले — 'सत्य, अहिंसा और निर्भयता ही असली विरासत'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर राजघाट, नई दिल्ली पहुँचकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गांधी समाधि पर आयोजित सर्व-धर्म प्रार्थना सभा में भाग लिया और पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राहुल गांधी ने बापू के सत्य, अहिंसा और निर्भयता के संदेश को उनकी सबसे स्थायी विरासत बताया।
राजघाट पर श्रद्धांजलि
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार सुबह राजघाट पहुँचे और सर्व-धर्म प्रार्थना में सम्मिलित हुए। उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाकर मौन श्रद्धांजलि दी। इस दौरान देशभर के नेताओं और नागरिकों ने भी गांधी जयंती के अवसर पर शांति, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को याद किया।
राहुल गांधी का संदेश
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'सत्य, अहिंसा और निर्भयता, यही बापू की सबसे बड़ी विरासत है। उन्होंने सिखाया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं, सत्य और अहिंसा के साथ डटे रहना ही सच्ची ताकत है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश में गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता पर व्यापक चर्चा जारी है।
खड़गे की श्रद्धांजलि और संदेश
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी राजघाट पहुँचे और गांधी समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। खड़गे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'सत्य को शक्ति, अहिंसा को साहस और सत्याग्रह को अन्याय के विरुद्ध सबसे प्रभावशाली अस्त्र बनाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी, बल्कि पूरी दुनिया को मानवता, करुणा और शांति का मार्ग दिखाया।'
खड़गे ने आगे लिखा, 'आज जब उनके विचारों और मूल्यों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हैं, तब बापू के सत्य, अहिंसा, सद्भाव और न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहना ही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। गांधी जयंती पर बापू को विनम्र नमन और सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।'
गांधी जयंती का राष्ट्रीय महत्व
गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को प्रतिवर्ष गांधी जयंती के रूप में राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाता है। यह दिन अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त है। 157वीं जयंती के इस मौके पर देशभर में सर्व-धर्म प्रार्थनाएँ, स्वच्छता अभियान और स्मरण समारोह आयोजित हुए, जिनमें राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भाग लिया।
आगे क्या
गांधी जयंती के अवसर पर दिए गए ये संदेश केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं हैं — विपक्षी नेताओं के बयान अक्सर मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में भी पढ़े जाते हैं। राहुल गांधी का 'निर्भयता' और 'अन्याय के सामने न झुकने' पर जोर इस दृष्टि से उल्लेखनीय है। देश में गांधीवादी मूल्यों की व्यावहारिक प्रासंगिकता पर बहस जारी रहने की संभावना है।