गांधी जयंती 2026: PM मोदी ने राजघाट पर बापू को दी पुष्पांजलि, खादी खरीदने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर राजघाट, नई दिल्ली पहुँचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। देशभर में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश साझा किया, जिसमें लिखा गया: 'बापू का कालजयी संदेश हमें एक बेहतर समाज और विकसित भारत की ओर प्रेरित करता रहे।' उनकी ओर से एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
PM मोदी के विचार — गांधी की प्रासंगिकता पर
वीडियो संदेश में मोदी ने कहा, '2 अक्टूबर का हमारे राष्ट्र के लिए क्या महत्व है, इसे बच्चा-बच्चा जानता है। महात्मा गांधी के विचारों ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। सत्ता से इतना दूर रहने के बावजूद आज भी वे करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब तक मानवता के साथ गांधी जी के विचारों का प्रवाह बना रहेगा, तब तक उनकी प्रेरणा और प्रासंगिकता भी हमारे बीच बनी रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब विश्वभर में अहिंसा और संवाद की राजनीति को लेकर नए सिरे से विमर्श हो रहा है।
खादी और स्वदेशी का आह्वान
मोदी ने गांधी जी के स्वदेशी दर्शन का स्मरण कराते हुए देशवासियों से अपील की कि वे 2 अक्टूबर को कोई न कोई खादी उत्पाद अवश्य खरीदें। उन्होंने कहा, 'गर्व से कहें कि ये स्वदेशी है।' गौरतलब है कि मोदी सरकार पिछले कई वर्षों से खादी बिक्री को बढ़ावा देने की मुहिम चलाती रही है, और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के आँकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में खादी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
संस्कृत श्लोक और बापू का संदेश
प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया गया — 'अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥' — जिसका आशय है कि जो व्यक्ति किसी से द्वेष नहीं रखता, सबसे मैत्री और करुणा का भाव रखता है, ममता-अहंकार से मुक्त है, सुख-दुख में समभावी है और क्षमाशील है, वही श्रेष्ठ साधक है। मोदी ने लिखा, 'पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा का ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जो हर युग में मानवता का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।'
क्या होगा आगे
2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मनाया जाता है, और इस अवसर पर देशभर के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांधी जी की विरासत को लेकर यह राष्ट्रीय संवाद आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।