मन की बात 139: मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' अपील — गांधी जयंती पर खादी बिक्री ₹28 करोड़ पार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को मन की बात के 139वें एपिसोड में देशवासियों से त्योहारी सीज़न में स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' की भावना जितनी तेज़ी से फैलेगी, उतनी ही तेज़ी से आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।
स्वदेशी उत्पादों की वैश्विक पहुँच
मोदी ने कहा, 'त्योहारों के इस मौसम में आसपास बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को महत्व देने लगे हैं।' उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस तक पहुँच रहा है और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक जा रही है। उनके अनुसार यह भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाज़ारों के नए द्वार खुलने का संकेत है।
पैकेजिंग पर नया ज़ोर
प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय द्वारा संचालित सबरी नेचुरल ब्रांड का उल्लेख किया, जो शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाज़ार में उतार रहा है। इस ब्रांड की आदिवासी कला से सजी पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित गुड डिज़ाइन अवार्ड मिल चुका है — जो भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
उन्होंने कर्नाटक के एक बांस स्टार्टअप का भी ज़िक्र किया, जो बांस और कृषि अवशेषों से पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में प्लास्टिक विकल्पों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
खादी की बढ़ती लोकप्रियता
मोदी ने बताया कि इस बार गांधी जयंती पर केवल एक ही दिन में गांधी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री ₹28 करोड़ से अधिक रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹1.5 करोड़ अधिक है। उन्होंने कहा कि खादी की यह बढ़ती लोकप्रियता उन कारीगरों तक सीधा लाभ पहुँचा रही है जिनके हुनर और परिश्रम से खादी व हैंडीक्राफ्ट उत्पाद तैयार होते हैं।
त्योहारी सीज़न में स्थानीय खरीदारी की अपील
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सीधे अनुरोध करते हुए कहा, 'इस बार भी खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों के बनाए गए उत्पादों को प्राथमिकता दें। आपकी खरीदारी से उनका उत्साह बढ़ेगा और वोकल फॉर लोकल अभियान आगे बढ़ेगा।' गौरतलब है कि यह अभियान 2020 में शुरू हुआ था और तब से हर त्योहारी मौसम में केंद्र सरकार इसे नए सिरे से प्रचारित करती है।
आगे की राह
मन की बात के मंच से इस तरह की अपीलें नीतिगत दिशा का संकेत देती हैं। स्थानीय उत्पादों के निर्यात के ताज़ा आँकड़े और गांधी जयंती पर खादी की रिकॉर्ड बिक्री यह दर्शाती है कि 'वोकल फॉर लोकल' अब केवल नारा नहीं, बल्कि एक मापने योग्य आर्थिक प्रवृत्ति बन रही है। आने वाले महीनों में सरकार की नीतियाँ यह तय करेंगी कि यह गति टिकाऊ है या नहीं।