30 अगस्त 2026
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'मन की बात' में PM मोदी का आह्वान: त्योहारों में 'वोकल फॉर लोकल' अपनाएं, भारत में बनी चीजें खरीदें

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'मन की बात' में PM मोदी का आह्वान: त्योहारों में 'वोकल फॉर लोकल' अपनाएं, भारत में बनी चीजें खरीदें

सारांश

त्योहारों से पहले PM मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में 'वोकल फॉर लोकल' का आह्वान दोहराया — और इस बार संदेश सिर्फ मिट्टी के दीयों तक नहीं, बल्कि घर की हर खरीद में भारत में बनी चीजों को चुनने तक फैला। इन्फ्लुएंसर्स और सेलेब्रिटी को भी अभियान का हिस्सा बनने का न्योता दिया गया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में देशवासियों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया।
उन्होंने 4 सितंबर को जन्माष्टमी, सितंबर में विश्वकर्मा पूजा और दीपावली से पहले 'वोकल फॉर लोकल' अपनाने की अपील की।
मोदी ने स्पष्ट किया कि 'वोकल फॉर लोकल' का विज़न केवल मिट्टी के दीये खरीदने से बड़ा है — घर के हर सामान में भारत में बनी चीजों को प्राथमिकता दें।
इन्फ्लुएंसर, सेलिब्रिटी और क्रिएटर्स से विशेष अपील की गई कि वे स्वयं अभियान अपनाएं और दूसरों को प्रेरित करें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग भारत में बनी चीजों पर गर्व करने से ही प्रशस्त होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में देशवासियों से आगामी त्योहारों के मौसम में 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को अपनाने और घर के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान में भारत में बनी चीजों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब नागरिक स्वदेशी उत्पादों पर गर्व करना शुरू करेंगे।

त्योहारों का मौसम और स्वदेशी संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आने वाले पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा, 'मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे पर्व और त्योहार, हमारी परंपराओं के साथ-साथ, हमें एक-दूसरे से जुड़ने का भी अवसर देते हैं।' उन्होंने 4 सितंबर को जन्माष्टमी, सितंबर में ही विश्वकर्मा पूजा और कुछ महीनों बाद आने वाली दीपावली का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आसपास के कारीगरों, शिल्पकारों और विश्वकर्मा साथियों का सम्मान किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब दीपावली की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं और बाज़ार में आयातित सजावटी सामान की बाढ़ आने से पहले स्वदेशी उत्पादकों को बढ़ावा देना नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है।

'वोकल फॉर लोकल' का व्यापक विज़न

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 'वोकल फॉर लोकल' का अर्थ केवल मिट्टी के दीये खरीदने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'इसका विज़न बहुत बड़ा है।' उनका आग्रह था कि घर के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान पर एक बार अवश्य ध्यान दिया जाए कि वह भारत में बना हो।

गौरतलब है कि यह आह्वान कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई आत्मनिर्भर भारत मुहिम की निरंतरता है, जिसे मोदी सरकार ने उपभोक्ता व्यवहार बदलने के एक सांस्कृतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है। 'मन की बात' के ज़रिए यह संदेश देना इस रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि यह कार्यक्रम करोड़ों श्रोताओं तक सीधे पहुँचता है।

क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स से विशेष अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल दुनिया के प्रभावशाली लोगों को भी इस अभियान में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, 'हमारे क्रिएटिव वर्ल्ड के साथियों, इन्फ्लुएंसर और सेलिब्रिटी की भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है।' उनका स्पष्ट संदेश था कि ये लोग स्वयं 'वोकल फॉर लोकल' को अपनाएं और अपने मंच का उपयोग दूसरों को प्रेरित करने के लिए करें।

यह पहली बार नहीं है जब मोदी ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को किसी राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की अपील की हो। इससे पहले भी फिट इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे अभियानों में डिजिटल क्रिएटर्स की सक्रिय भागीदारी माँगी गई थी।

आम जनता पर असर

प्रधानमंत्री के इस आह्वान का सीधा असर त्योहारी सीज़न की खरीदारी पर पड़ सकता है। स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प उत्पादकों और लघु उद्योगों को इस मौसम में बढ़ी हुई माँग से लाभ मिलने की उम्मीद है। आलोचकों का कहना है कि उपभोक्ता जागरूकता के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।

आगे देखें तो दीपावली से पहले के सप्ताहों में इस अभियान की गूँज बाज़ार में दिखेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इन्फ्लुएंसर समुदाय और व्यापारिक संगठन इस संदेश को किस हद तक आगे बढ़ाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उपभोक्ता व्यवहार में कोई मापनीय बदलाव आया है। स्थानीय कारीगर और हस्तशिल्प उद्योग तब तक इस अभियान का पूरा लाभ नहीं उठा सकते, जब तक आपूर्ति श्रृंखला, गुणवत्ता नियंत्रण और ऑनलाइन बाज़ार तक उनकी पहुँच नहीं बढ़ती। इन्फ्लुएंसर्स को शामिल करने की रणनीति नई है, लेकिन डिजिटल प्रचार और ज़मीनी बदलाव के बीच की खाई पाटने के लिए ठोस नीतिगत समर्थन ज़रूरी है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में क्या कहा?
PM मोदी ने 30 अगस्त को 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में देशवासियों से त्योहारी मौसम में 'वोकल फॉर लोकल' अपनाने और घर के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान में भारत में बनी चीजों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग स्वदेशी उत्पादों पर गर्व करने से ही प्रशस्त होगा।
'वोकल फॉर लोकल' का क्या अर्थ है?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार 'वोकल फॉर लोकल' का अर्थ केवल मिट्टी के दीये खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विज़न बहुत बड़ा है। इसमें घर के लिए खरीदे जाने वाले हर उत्पाद में भारत में निर्मित सामान को प्राथमिकता देना और स्थानीय कारीगरों व उद्योगों को प्रोत्साहित करना शामिल है।
मोदी ने किन त्योहारों का उल्लेख किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 4 सितंबर को जन्माष्टमी, सितंबर में ही विश्वकर्मा पूजा और कुछ महीनों बाद आने वाली दीपावली का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आसपास के कारीगरों और शिल्पकारों का सम्मान करने की भी अपील की।
क्या इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटी को भी इस अभियान में शामिल किया गया है?
हाँ, PM मोदी ने क्रिएटिव वर्ल्ड के साथियों, इन्फ्लुएंसर और सेलिब्रिटी से विशेष अपील की कि वे स्वयं 'वोकल फॉर लोकल' को अपनाएं और अपने मंच के ज़रिए दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
आत्मनिर्भर भारत और 'वोकल फॉर लोकल' में क्या संबंध है?
'वोकल फॉर लोकल' आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक उपभोक्ता-केंद्रित स्तंभ है, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया था। PM मोदी के अनुसार, जब नागरिक भारत में बनी चीजों को प्राथमिकता देंगे, तभी देश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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