एनडीए में 'कोटे में कोटा' पर दरार: मांझी ने चिराग पासवान को बताया असंवैधानिक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार, 30 अगस्त को अपने ही गठबंधन सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर 'असंवैधानिक काम' करने का आरोप लगाया। यह विवाद अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण यानी 'कोटे में कोटा' की माँग को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर खुलकर सामने आया है।
विवाद की जड़: क्या है 'कोटे में कोटा' मुद्दा
जीतन राम मांझी और बिहार के मंत्री संतोष सुमन (मांझी के पुत्र) लंबे समय से SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की माँग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुँचा है और कुछ अपेक्षाकृत सशक्त जातियाँ इसका अधिकांश लाभ उठा रही हैं। संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग आरक्षण समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि सबसे वंचित तबकों को उनका न्यायसंगत हिस्सा दिलाने के लिए है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में बहुमत के फैसले में राज्यों को SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने का अधिकार दिया है, और कथित तौर पर करीब आधा दर्जन राज्य इसे पहले ही लागू कर चुके हैं।
मांझी का पलटवार: 'इस्तीफा उन्हें देना चाहिए जो संविधान के खिलाफ बोलें'
मांझी की यह तीखी प्रतिक्रिया चिराग पासवान के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई, जिसमें पासवान ने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की माँग का विरोध किया था और कहा था कि ऐसी माँग करने वालों को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
मांझी ने कहा, 'चिराग पासवान जो कुछ भी कर रहे हैं, वह असंवैधानिक है।' उन्होंने आगे तर्क दिया, 'यह असंवैधानिक है क्योंकि हम कोटे के अंदर कोटा की माँग कर रहे हैं, जिसका समर्थन सुप्रीम कोर्ट ने भी किया है। कोर्ट ने बहुमत से फैसला देते हुए राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है।' उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, 'जो चीज पहले ही लागू हो चुकी है, उसकी माँग करने के लिए इस्तीफा देने की क्या बात है? जो संविधान के खिलाफ बोल रहा है, उसे इस्तीफा देना चाहिए।'
चिराग पासवान का पक्ष: आरक्षण का मूल उद्देश्य न बदले
हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान का स्पष्ट मत है कि आरक्षण की नींव आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और छुआछूत को दूर करना है। उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि मांझी और संतोष सुमन को 'क्रीमी लेयर की अवधारणा का समर्थन करने दें और अपने-अपने पद छोड़ दें।' पासवान ने किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवैधानिक और संसदीय बहस की माँग की है।
पासवान ने इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि इतने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद यदि सामाजिक भेदभाव बना हुआ है, तो इसका जवाब कांग्रेस को भी देना होगा।
NDA की एकता पर सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब NDA सरकार संसद के अगले सत्र से पहले अपनी आंतरिक सहमति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। SC/ST उप-वर्गीकरण का मुद्दा संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे दलित और आदिवासी वोट बैंक को प्रभावित करता है — जिन पर BJP, LJP (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) सभी की नजर है। दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के बीच इस तरह का सार्वजनिक टकराव गठबंधन की अंदरूनी कशमकश को उजागर करता है।
आगे क्या
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद SC/ST उप-वर्गीकरण का मुद्दा अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नीतिगत भी बन गया है। देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है या गठबंधन की मजबूरियों के चलते मौन रहती है। NDA के भीतर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।