30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एनडीए में 'कोटे में कोटा' पर दरार: मांझी ने चिराग पासवान को बताया असंवैधानिक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एनडीए में 'कोटे में कोटा' पर दरार: मांझी ने चिराग पासवान को बताया असंवैधानिक

सारांश

NDA के भीतर 'कोटे में कोटा' पर खुली जंग — मांझी ने चिराग पासवान को असंवैधानिक करार दिया, पासवान ने माँग करने वालों से इस्तीफे की बात कही। सर्वोच्च न्यायालय के उप-वर्गीकरण फैसले के बाद यह टकराव दलित राजनीति के केंद्र में आ गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 30 अगस्त को चिराग पासवान पर 'असंवैधानिक काम' करने का आरोप लगाया।
SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण ('कोटे में कोटा') की माँग पर NDA के भीतर दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के बीच सार्वजनिक टकराव।
सर्वोच्च न्यायालय बहुमत फैसले में राज्यों को SC/ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने का अधिकार दे चुका है; करीब आधा दर्जन राज्यों ने इसे लागू किया।
चिराग पासवान का तर्क — आरक्षण सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए है, आर्थिक आधार पर नहीं; किसी बदलाव से पहले संसदीय बहस जरूरी।
पासवान ने राहुल गांधी और कांग्रेस से भी सवाल किया — दशकों की सत्ता के बाद सामाजिक भेदभाव के लिए जवाबदेही माँगी।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार, 30 अगस्त को अपने ही गठबंधन सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर 'असंवैधानिक काम' करने का आरोप लगाया। यह विवाद अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण यानी 'कोटे में कोटा' की माँग को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर खुलकर सामने आया है।

विवाद की जड़: क्या है 'कोटे में कोटा' मुद्दा

जीतन राम मांझी और बिहार के मंत्री संतोष सुमन (मांझी के पुत्र) लंबे समय से SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की माँग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि आरक्षण का लाभ सभी अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुँचा है और कुछ अपेक्षाकृत सशक्त जातियाँ इसका अधिकांश लाभ उठा रही हैं। संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग आरक्षण समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि सबसे वंचित तबकों को उनका न्यायसंगत हिस्सा दिलाने के लिए है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में बहुमत के फैसले में राज्यों को SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने का अधिकार दिया है, और कथित तौर पर करीब आधा दर्जन राज्य इसे पहले ही लागू कर चुके हैं।

मांझी का पलटवार: 'इस्तीफा उन्हें देना चाहिए जो संविधान के खिलाफ बोलें'

मांझी की यह तीखी प्रतिक्रिया चिराग पासवान के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आई, जिसमें पासवान ने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की माँग का विरोध किया था और कहा था कि ऐसी माँग करने वालों को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

मांझी ने कहा, 'चिराग पासवान जो कुछ भी कर रहे हैं, वह असंवैधानिक है।' उन्होंने आगे तर्क दिया, 'यह असंवैधानिक है क्योंकि हम कोटे के अंदर कोटा की माँग कर रहे हैं, जिसका समर्थन सुप्रीम कोर्ट ने भी किया है। कोर्ट ने बहुमत से फैसला देते हुए राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है।' उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, 'जो चीज पहले ही लागू हो चुकी है, उसकी माँग करने के लिए इस्तीफा देने की क्या बात है? जो संविधान के खिलाफ बोल रहा है, उसे इस्तीफा देना चाहिए।'

चिराग पासवान का पक्ष: आरक्षण का मूल उद्देश्य न बदले

हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान का स्पष्ट मत है कि आरक्षण की नींव आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और छुआछूत को दूर करना है। उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि मांझी और संतोष सुमन को 'क्रीमी लेयर की अवधारणा का समर्थन करने दें और अपने-अपने पद छोड़ दें।' पासवान ने किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवैधानिक और संसदीय बहस की माँग की है।

पासवान ने इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि इतने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद यदि सामाजिक भेदभाव बना हुआ है, तो इसका जवाब कांग्रेस को भी देना होगा।

NDA की एकता पर सवाल

यह ऐसे समय में आया है जब NDA सरकार संसद के अगले सत्र से पहले अपनी आंतरिक सहमति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। SC/ST उप-वर्गीकरण का मुद्दा संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे दलित और आदिवासी वोट बैंक को प्रभावित करता है — जिन पर BJP, LJP (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) सभी की नजर है। दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के बीच इस तरह का सार्वजनिक टकराव गठबंधन की अंदरूनी कशमकश को उजागर करता है।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद SC/ST उप-वर्गीकरण का मुद्दा अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नीतिगत भी बन गया है। देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है या गठबंधन की मजबूरियों के चलते मौन रहती है। NDA के भीतर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर वे वर्षों से चुप्पी साधे थे। विडंबना यह है कि मांझी और पासवान — दोनों ही NDA के घटक दल हैं और दोनों ही दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं — लेकिन उनकी राजनीतिक जड़ें अलग-अलग जातीय समीकरणों में हैं। बिना केंद्र सरकार की स्पष्ट नीतिगत स्थिति के, यह विवाद गठबंधन की एकता को परखने वाला सबसे संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कोटे में कोटा' विवाद क्या है और NDA में यह क्यों उभरा?
'कोटे में कोटा' यानी SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की माँग है, जिससे सबसे वंचित उपजातियों को आरक्षण का अधिक लाभ मिले। NDA में यह विवाद तब सामने आया जब मांझी और संतोष सुमन ने इसकी खुलकर माँग की, जबकि चिराग पासवान ने इसे आरक्षण के मूल उद्देश्य के विरुद्ध बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने SC/ST उप-वर्गीकरण पर क्या फैसला दिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत के फैसले में राज्यों को SC/ST आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने का संवैधानिक अधिकार दिया है। कथित तौर पर करीब आधा दर्जन राज्य इसे पहले ही लागू कर चुके हैं।
चिराग पासवान ने उप-वर्गीकरण का विरोध क्यों किया?
चिराग पासवान का मानना है कि आरक्षण आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को दूर करने के लिए है। उन्होंने तर्क दिया कि क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण जैसे बदलाव आरक्षण के मूल उद्देश्य को कमजोर करेंगे और इन पर पहले व्यापक संसदीय बहस होनी चाहिए।
मांझी ने चिराग पासवान को असंवैधानिक क्यों कहा?
मांझी का तर्क है कि 'कोटे में कोटा' की माँग सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है, इसलिए इसे असंवैधानिक कहना गलत है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति न्यायालय के फैसले और संविधान के विरुद्ध बोल रहा है, उसे इस्तीफा देना चाहिए।
इस विवाद का NDA गठबंधन पर क्या असर पड़ सकता है?
दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के बीच यह सार्वजनिक टकराव NDA की आंतरिक एकता पर सवाल उठाता है। SC/ST उप-वर्गीकरण का मुद्दा दलित और आदिवासी वोट बैंक से सीधे जुड़ा है, जिस पर गठबंधन के कई घटक दलों की राजनीतिक निर्भरता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 13 घंटे पहले
  3. 19 घंटे पहले
  4. कल
  5. कल
  6. 4 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले