चिराग पासवान ने पटना में मनाया रक्षा बंधन, आरक्षण समीक्षा को बताया 'खात्मे की साज़िश'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने 28 अगस्त को पटना स्थित अपने आवास पर रक्षा बंधन का पर्व परिवार और पार्टी के साथ धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर उनकी बहनों के अलावा समस्तीपुर से पार्टी की सबसे युवा सांसद शांभवी चौधरी ने भी उन्हें राखी बांधी। उत्सव के बाद मीडिया से बातचीत में चिराग ने आरक्षण प्रणाली की किसी भी समीक्षा का कड़ा विरोध दोहराया और इसे संवैधानिक अधिकार करार दिया।
पारिवारिक और राजनीतिक बंधन एक साथ
शांभवी चौधरी ने चिराग को अपना बड़ा भाई बताते हुए कहा कि वह हर वर्ष उन्हें राखी बांधती हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ बंधन रक्त संबंधों से परे होते हैं। कुछ बंधन हम खुद बनाते हैं, और चिराग भैया के साथ मेरा रिश्ता ऐसा ही एक बंधन है — यह हमेशा अटूट रहेगा।' शांभवी ने चिराग की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता की कामना भी की।
नेपाल बाढ़ पर संवेदना
चिराग पासवान ने देश-विदेश के सभी भाई-बहनों को रक्षा बंधन की शुभकामनाएं देते हुए नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल दोनों देशों में यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है, इसलिए नेपाल में इस समय आई आपदा और भी पीड़ादायक है।
आरक्षण पर चिराग का कड़ा रुख
चिराग पासवान ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि आरक्षण प्रणाली की समीक्षा का कोई भी प्रस्ताव उन्हें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, जो लोग समीक्षा की मांग कर रहे हैं, वे अंततः इसे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरक्षण को सामाजिक न्याय का अनिवार्य साधन बताते हुए कहा कि 'यह संवैधानिक अधिकार है, दान नहीं।'
चिराग ने चेतावनी दी कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक जन विरोध को जन्म दे सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान हाशिए पर पड़े समुदायों को मुख्यधारा में शामिल होने का तंत्र प्रदान करता है, और इस तंत्र से छेड़छाड़ सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांत को कमज़ोर करेगी।
एनडीए के भीतर उभरती दरार
चिराग की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद सतह पर आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने आरक्षण प्रणाली की समीक्षा की मांग की है और अनुसूचित जाति के भीतर उप-वर्गीकरण — यानी 'कोटा के भीतर कोटा' — की वकालत की है। बिहार के मंत्री और HAM नेता संतोष कुमार सुमन ने भी समीक्षा के पक्ष में बात की है। गठबंधन सहयोगियों के बीच यह सार्वजनिक असहमति बिहार की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ का संकेत देती है।
आगे का परिदृश्य
आरक्षण पर NDA के भीतर यह बहस आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। चिराग पासवान का स्पष्ट और दृढ़ रुख उनके दलित मतदाता आधार को संदेश देने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। गठबंधन में यह आंतरिक तनाव किस दिशा में जाएगा, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।