अखिलेश यादव की मुस्लिम महिलाओं से राखी पर भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर का 'घर वापसी' वाला तंज
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा रक्षाबंधन पर मुस्लिम महिलाओं से राखी बंधवाने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। गाजियाबाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने 28 अगस्त को इस पर तीखा तंज कसते हुए दावा किया कि अखिलेश यादव ने मुस्लिम बहनों की 'घर वापसी' करा दी है।
गुर्जर का विवादित बयान
भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा, 'राखी बंधी है, मैंने देखा है। भले ही रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान पूरे पारंपरिक तरीके से नहीं बंधी हो, लेकिन राखी बंधी जरूर थी।' उन्होंने आगे दावा किया कि जिन मुस्लिम महिलाओं ने तीज मनाई और तीज के गीत गाए, वे इस्लाम के दायरे में नहीं रह सकतीं और 'काफिर' यानी हिंदू बन गईं। गुर्जर ने यह भी जोड़ा कि इसी तर्ज पर अखिलेश यादव ने मुस्लिम बहनों की 'घर वापसी' कराकर अच्छा काम किया है और अब उनके परिवार के लोग भी सनातनी हिंदू बन गए हैं।
अखिलेश यादव का रक्षाबंधन कार्यक्रम
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रक्षाबंधन के अवसर पर सैफई और लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालयों में महिला कार्यकर्ताओं समेत अनेक महिलाओं से राखी बंधवाई। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों के नाम एक संदेश भी जारी किया। गौरतलब है कि भाजपा विधायक ने खुद स्वीकार किया कि उनकी पार्टी की ओर से भी एक नेता ने मुस्लिम महिलाओं को तीज उत्सव में आमंत्रित किया था।
अखिलेश का महिला सशक्तिकरण संदेश
अखिलेश यादव ने एक पत्र के माध्यम से कहा, 'रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, यह विश्वास, सम्मान, सुरक्षा और रिश्तों की पवित्र जिम्मेदारी का प्रतीक है।' उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नेतृत्व के अधिकार को अपना व्यक्तिगत संकल्प बताया। सपा प्रमुख ने कहा कि वह ऐसे उत्तर प्रदेश के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ महिलाओं को समान अवसर और न्याय मिले।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आलोचकों का कहना है कि गुर्जर का बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकता है। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन को 'घर वापसी' की शब्दावली से जोड़ा गया हो — यह शब्द पहले भी धर्मांतरण विवादों में इस्तेमाल होता रहा है। आगे आने वाले दिनों में यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।