29 अगस्त 2026
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रायलसीमा सूखा संकट: वाईएसआरसीपी का आरोप — गठबंधन सरकार पूरी तरह विफल, खरीफ बुआई 39% तक सिमटी

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रायलसीमा सूखा संकट: वाईएसआरसीपी का आरोप — गठबंधन सरकार पूरी तरह विफल, खरीफ बुआई 39% तक सिमटी

सारांश

रायलसीमा में खरीफ बुआई 39-40% तक सिमट गई है, भूजल 20 मीटर तक गिरा और दूध उत्पादन 75% लुढ़का — वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार पर सूखे से निपटने में पूरी नाकामी का आरोप लगाया और श्रीसैलम से 30-40 टीएमसी पानी तत्काल मोड़ने की माँग की।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 28 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार रायलसीमा के सूखे से निपटने में नाकाम रही।
क्षेत्र में खरीफ बुआई घटकर मात्र 39-40% , भूजल स्तर 12-20 मीटर नीचे और दूध उत्पादन में 75% की गिरावट।
तेलंगाना ने बिजली उत्पादन के लिए श्रीसैलम से करीब 53 टीएमसी पानी छोड़ा; आंध्र सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप।
श्रीसैलम जलाशय में भंडारण घटकर करीब 160 टीएमसी — हांड्री-नीवा और रायलसीमा परियोजनाओं पर संकट।
पार्टी ने पोथिरेड्डीपाडु के ज़रिए 30-40 टीएमसी पानी तत्काल मोड़ने, किसानों को मुआवजा और चारे-पेयजल संकट हल करने की माँग की।
सरकार के कार्रवाई न करने पर श्रीसैलम परियोजना पर बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 28 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार रायलसीमा में भीषण सूखे से निपटने में पूरी तरह नाकाम रही है, जिसके चलते किसानों को सिंचाई, पेयजल और पशु चारे की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है। पार्टी नेताओं ने अनंतपुर स्थित वाईएसआरसीपी जिला कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह आरोप लगाए।

मुख्य घटनाक्रम

वाईएसआरसीपी नेता अनंत वेंकटरामी रेड्डी और पूर्व मंत्री साके शैलजानाथ ने बताया कि रायलसीमा में खरीफ की बुआई घटकर मात्र 39-40 प्रतिशत रह गई है। भूजल स्तर 12 से 20 मीटर तक गिर चुका है और हरे चारे की कमी के कारण दूध उत्पादन में करीब 75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

अनंत वेंकटरामी रेड्डी ने कहा कि अल नीनो और कमज़ोर मानसून की चेतावनियाँ पहले से मौजूद थीं, बावजूद इसके सरकार के पास कोई ठोस आपातकालीन कार्ययोजना नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना ने बिजली उत्पादन के लिए श्रीसैलम बाँध से करीब 53 टीएमसी पानी छोड़ा, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार इस मामले पर मौन बनी रही।

जल संकट की गहराती चुनौती

पूर्व मंत्री शैलजानाथ ने चेतावनी दी कि श्रीसैलम जलाशय में भंडारण घटकर करीब 160 टीएमसी रह गया है। उनके अनुसार, बिजली उत्पादन के लिए लगातार पानी छोड़े जाने से तेलुगु गंगा, हांड्री-नीवा और रायलसीमा की अन्य परियोजनाओं में जल-आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'बिजली तो खरीदी जा सकती है, लेकिन खोया हुआ पानी वापस नहीं लाया जा सकता।'

पार्टी ने माँग की कि पोथिरेड्डीपाडु के ज़रिए कम से कम 30-40 टीएमसी पानी तत्काल तेलुगु गंगा, हांड्री-नीवा, पेयजल प्रणालियों और रायलसीमा की अन्य परियोजनाओं की ओर मोड़ा जाए।

पिछली सरकार के दावे और मौजूदा स्थिति

वाईएसआरसीपी नेताओं ने याद दिलाया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में फसल बीमा प्रीमियम के रूप में करीब ₹8,600 करोड़ और इनपुट सब्सिडी के रूप में ₹11,000 करोड़ का भुगतान किसानों को किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा गठबंधन सरकार के राज में किसान सूखे से बर्बाद हुई फसलों का बीमा प्रीमियम भी खुद चुकाने पर मजबूर हैं।

सरकार से माँगें और आंदोलन की चेतावनी

वाईएसआरसीपी नेताओं ने राज्य सरकार से तीन तत्काल माँगें रखीं — बिजली उत्पादन के लिए पानी की अनावश्यक निकासी बंद की जाए, सूखे से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए और पशु चारे व पेयजल की कमी को फौरी तौर पर दूर किया जाए। नेताओं ने किसानों को आश्वासन दिया कि वाईएसआरसीपी उनके संघर्ष में साथ खड़ी रहेगी और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो पार्टी श्रीसैलम परियोजना पर बड़े विरोध प्रदर्शन सहित अपना आंदोलन तेज़ करेगी।

आगे क्या

रायलसीमा में जल संकट और सूखे की स्थिति आने वाले हफ्तों में और गंभीर होने की आशंका है, क्योंकि खरीफ सीज़न अपने निर्णायक दौर में है। गठबंधन सरकार की प्रतिक्रिया और श्रीसैलम जलाशय से जल प्रबंधन के फैसले इस क्षेत्र के लाखों किसानों और आम नागरिकों के लिए निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी आपातकालीन योजना का अभाव गंभीर प्रशासनिक चूक को दर्शाता है। श्रीसैलम से तेलंगाना द्वारा 53 टीएमसी पानी छोड़े जाने पर आंध्र सरकार की चुप्पी अंतर-राज्यीय जल राजनीति की जटिलता को उजागर करती है, जहाँ किसान और आम नागरिक पिसते हैं। वाईएसआरसीपी के आरोपों में राजनीतिक स्वर है, लेकिन 39% खरीफ बुआई और 75% दूध उत्पादन गिरावट के आँकड़े यदि सत्यापित हों, तो यह संकट चुनावी बयानबाज़ी से कहीं बड़ा है। असली सवाल यह है कि क्या गठबंधन सरकार जल वितरण पर ठोस नीतिगत निर्णय लेगी या विरोध के तेज़ होने तक इंतज़ार करेगी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायलसीमा में सूखे की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
वाईएसआरसीपी नेताओं के अनुसार, रायलसीमा में खरीफ बुआई घटकर 39-40% रह गई है, भूजल स्तर 12-20 मीटर तक गिर चुका है और दूध उत्पादन में करीब 75% की गिरावट आई है। श्रीसैलम जलाशय में भंडारण भी घटकर करीब 160 टीएमसी रह गया है।
वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी का आरोप है कि गठबंधन सरकार के पास अल नीनो और कमज़ोर मानसून की चेतावनियों के बावजूद कोई आपातकालीन योजना नहीं थी। साथ ही, तेलंगाना द्वारा श्रीसैलम से 53 टीएमसी पानी बिजली उत्पादन के लिए छोड़े जाने पर सरकार चुप रही, जिससे रायलसीमा का जल संकट और गहरा हुआ।
वाईएसआरसीपी ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — बिजली उत्पादन के लिए श्रीसैलम से पानी की अनावश्यक निकासी बंद हो, पोथिरेड्डीपाडु के ज़रिए 30-40 टीएमसी पानी रायलसीमा परियोजनाओं की ओर मोड़ा जाए और सूखाग्रस्त किसानों को मुआवजा तथा पशु चारे व पेयजल की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए।
पिछली वाईएसआरसीपी सरकार ने किसानों के लिए क्या किया था?
वाईएसआरसीपी नेताओं के दावे के अनुसार, उनकी सरकार ने फसल बीमा प्रीमियम के रूप में करीब ₹8,600 करोड़ और इनपुट सब्सिडी के रूप में ₹11,000 करोड़ का भुगतान किसानों को किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में किसान सूखे से बर्बाद फसलों का बीमा प्रीमियम भी खुद चुकाने पर मजबूर हैं।
यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो वाईएसआरसीपी क्या करेगी?
वाईएसआरसीपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि गठबंधन सरकार समय पर कदम नहीं उठाती, तो पार्टी श्रीसैलम परियोजना पर बड़े विरोध प्रदर्शन सहित अपना आंदोलन तेज़ करेगी। नेताओं ने किसानों को आश्वासन दिया कि वाईएसआरसीपी उनके संघर्ष में साथ खड़ी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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