जगन मोहन रेड्डी का आरोप: गठबंधन सरकार ने जलीय कृषि क्षेत्र को सिंडिकेट के हवाले किया
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार, 15 जुलाई को पश्चिम गोदावरी जिले के भीमावरम में जल किसानों की एक सभा को संबोधित करते हुए राज्य की गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसान विरोधी नीतियों के ज़रिए जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) क्षेत्र को जानबूझकर संकट में धकेला जा रहा है और इसके पीछे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) समर्थित कंपनियों का एक सिंडिकेट काम कर रहा है।
मत्स्यपालकों की दुर्दशा: लागत से कम मिल रहा है भाव
जगन मोहन रेड्डी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मत्स्यपालकों की उत्पादन लागत ₹275 प्रति किलोग्राम है, जबकि उन्हें बाज़ार में मात्र ₹230 प्रति किलोग्राम का भाव मिल रहा है। यानी प्रति किलोग्राम ₹45 का सीधा घाटा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीज, चारा और खरीद — तीनों स्तरों पर काम करने वाली कंपनियों ने एक सिंडिकेट बना लिया है, जो मनमाने ढंग से चारे की कीमतें तय करता है और खरीद के समय दाम गिरा देता है, जिससे किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पाते।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार महीनों में मत्स्यपालन चारे की कीमत में ₹16 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हो चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा मात्र ₹2 की कटौती को उन्होंने 'दिखावटी राहत' करार दिया।
सिंडिकेट पर आरोप और टीडीपी कनेक्शन
जगन मोहन रेड्डी ने दावा किया कि बीज, चारा और खरीद से जुड़ी कंपनियाँ टीडीपी समर्थक हैं और इन्हें पार्टी नेतृत्व का संरक्षण प्राप्त है। उनके अनुसार, गठबंधन सरकार किसानों की कीमत पर इन कंपनियों के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ जलीय कृषि नहीं, बल्कि किसी भी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं दिया जा रहा, जो चंद्रबाबू नायडू की व्यापक किसान विरोधी नीति का प्रमाण है।
वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल से तुलना
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार ने जलीय कृषि क्षेत्र को विनियमित करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य जलीय कृषि विकास प्राधिकरण अधिनियम लागू किया था, जिससे कीमतों की निगरानी होती थी और किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाता था। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने मत्स्यपालकों को ₹1.50 प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई और पाँच वर्षों में ₹3,306 करोड़ की सब्सिडी दी। साथ ही, चंद्रबाबू की पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए ₹401 करोड़ के बकाये का भी भुगतान किया गया।
गौरतलब है कि मौजूदा गठबंधन सरकार ने उस अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार कर दिया है, जिससे मूल्य निगरानी तंत्र कमज़ोर पड़ गया है — यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जलीय कृषि उत्पादन लागत बढ़ रही है।
जगन का वादा: सत्ता में वापसी पर सिंडिकेट खत्म होगा
जगन मोहन रेड्डी ने जल किसानों को भरोसा दिलाया कि वाईएसआरसीपी उनके साथ खड़ी है और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, 'सत्ता में वापस आने पर हम सुनिश्चित करेंगे कि इन सिंडिकेटों का सफाया हो जाए।' यह बयान आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की किसान-केंद्रित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।