विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसा: जगन मोहन रेड्डी ने मृतकों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ अतिरिक्त मुआवजे की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार, 10 जून 2026 को विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में हुए घातक विस्फोट के पीड़ित परिवारों के लिए ₹1 करोड़ की अतिरिक्त मुआवजा राशि और एक सरकारी नौकरी की माँग की। अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
हादसे का विवरण
जगन मोहन रेड्डी के अनुसार इस लिक्विड मेटल ब्लास्ट में 9 कर्मचारियों की मौत हो गई और 5 घायल हुए, जिनमें से एक की हालत अत्यंत गंभीर है — वह 95 प्रतिशत तक जल चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना में कर्मचारियों की कोई व्यक्तिगत चूक नहीं थी, इसलिए उन्हें उचित मुआवजे का पूरा हक है।
मुआवजे पर सरकार बनाम विपक्ष
रेड्डी ने कहा कि गठबंधन सरकार ₹1.72 करोड़ के मुआवजा पैकेज का दावा कर रही है, लेकिन यह राशि वास्तव में बीमा और अन्य देय लाभों का हिस्सा है — कोई अतिरिक्त सरकारी सहायता नहीं। उन्होंने माँग की कि इन देय राशियों के अलावा प्रत्येक मृतक कर्मचारी के परिवार को ₹1 करोड़ अतिरिक्त और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। उन्होंने एलजी पॉलिमर्स हादसे के दौरान अपनाए गए मुआवजा मॉडल का हवाला देते हुए सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
पेंटियाह मामले में वादाखिलाफी का आरोप
रेड्डी ने अप्रैल 2025 में इसी स्टील प्लांट में इसी तरह की परिस्थितियों में मारे गए कर्मचारी पेंटियाह के परिवार का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि परिवार को मुआवजे और नौकरी का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वीएसपी निजीकरण और कर्मचारी कटौती पर चिंता
जगन मोहन रेड्डी ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (VSP) के निजीकरण का विरोध करते हुए माँग की कि गठबंधन सरकार विधानसभा में इसके विरुद्ध एक प्रस्ताव पारित करे — जैसा YSRCP सरकार ने पहले किया था। उन्होंने बताया कि YSRCP के कार्यकाल में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निजीकरण का विरोध किया गया था और प्लांट को लाभकारी इकाई बनाने के सुझाव भी दिए गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल में कर्मचारियों की संख्या 28,000 से घटकर 16,000 रह गई है और कुल 10,500 कर्मचारियों को वीआरएस, रिटायरमेंट या छंटनी के जरिए हटाया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रबंधन कर्मचारियों पर वीआरएस लेने का दबाव बना रहा है, मेडिकल सुविधाएँ, एचआरए, एलटीए और बोनस में कटौती की गई है, और क्वार्टर में बिजली दर ₹0.50 प्रति यूनिट से बढ़ाकर ₹8.50 प्रति यूनिट कर दी गई है।
गौरतलब है कि सरकार VSP के लिए ₹11,440 करोड़ के पैकेज का दावा कर रही है, लेकिन रेड्डी के अनुसार यह राशि सुरक्षा मानकों या कर्मचारी कल्याण के लिए नहीं, बल्कि वीआरएस, बैंक बकाये और इसी तरह के अन्य उपायों के लिए है।
आगे क्या
विपक्ष की माँगों और मृतक परिवारों की पीड़ा के बीच राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह मुद्दा विधानसभा में बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।