14 जुलाई 2026
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विशाखापट्टनम नौका हादसा: जगन मोहन रेड्डी ने नायडू सरकार को ठहराया जिम्मेदार, ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग

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विशाखापट्टनम नौका हादसा: जगन मोहन रेड्डी ने नायडू सरकार को ठहराया जिम्मेदार, ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग

सारांश

विशाखापट्टनम के समुद्र में नाव पलटने से 6 मछुआरों की मौत के बाद जगन मोहन रेड्डी ने नायडू सरकार पर एसओएस को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। परिजनों से मिलकर ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की और वाईएसआरसीपी की ओर से ₹7 लाख की तत्काल सहायता घोषित की।

मुख्य बातें

विशाखापट्टनम के पास गंगावरम पोर्ट से 10 मील दूर नाव पलटने से 6 मछुआरों की मौत हुई; एकमात्र जीवित बचे चिन्ना को एक चीनी जहाज ने बचाया।
पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने 14 जुलाई को पीड़ित परिवारों से मिलकर ₹1-1 करोड़ मुआवजे की मांग की।
परिजनों का दावा — 4 जुलाई की रात एसओएस भेजा गया, जबकि सरकारी समिति की रिपोर्ट कहती है जानकारी 5 जुलाई सुबह 5 बजे मिली।
सरकार ने अब तक प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख मुआवजा दिया; जगन ने इसे अपर्याप्त बताया।
वाईएसआरसीपी ने मृतकों के परिवारों और बचे व्यक्ति को ₹7-7 लाख की आर्थिक सहायता घोषित की।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 14 जुलाई को विशाखापट्टनम में नौका हादसे में जान गंवाने वाले छह मछुआरों के परिजनों से मुलाकात की और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

हादसे का घटनाक्रम

गंगावरम पोर्ट से करीब 10 मील की दूरी पर समुद्र में सात मछुआरों को ले जा रही नाव पलट गई। हादसे में केवल चिन्ना नामक एक मछुआरा तैरकर बच निकला, जिसे बाद में एक चीनी जहाज ने बचाया। जगन मोहन रेड्डी ने इस बचे हुए एकमात्र व्यक्ति से भी मुलाकात कर घटना का विस्तृत ब्यौरा लिया।

जगन के अनुसार, मृतक मछुआरों के परिजनों ने 4 जुलाई की रात ही एसओएस संदेश भेज दिए थे और कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को बार-बार फोन किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि समय पर प्रतिक्रिया होती तो बाकी मछुआरों की जान बचाई जा सकती थी।

सरकारी समिति की रिपोर्ट पर सवाल

जगन मोहन रेड्डी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना की जानकारी 5 जुलाई सुबह 5 बजे मिली, जबकि मृतकों के परिवारों के कॉल रिकॉर्ड और संदेश यह साबित करते हैं कि 4 जुलाई की रात ही अलर्ट भेजे जा चुके थे। उन्होंने इस विरोधाभास को सरकारी लापरवाही का प्रमाण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि विशाखापट्टनम में कोस्ट गार्ड की उपस्थिति है और यह पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय भी है — इसके बावजूद समय पर बचाव अभियान नहीं चलाया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया पर आक्षेप

जगन मोहन रेड्डी ने कहा, 'सबसे दुखद बात यह है कि मुख्यमंत्री से लेकर मत्स्य पालन और आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्रियों तक, किसी ने भी अब तक पीड़ित परिवारों से मुलाकात नहीं की। सरकार ने केवल ₹10-10 लाख का मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।'

उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर प्रयास किए गए थे।

वाईएसआरसीपी की आर्थिक सहायता

वाईएसआरसीपी के विशाखापट्टनम जिला अध्यक्ष के.के. राजू ने बताया कि जगन मोहन रेड्डी ने मृतक मछुआरों के परिवारों और बचे हुए व्यक्ति चिन्ना को ₹7-7 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

आगे क्या

जगन मोहन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यदि मौजूदा गठबंधन सरकार प्रत्येक परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा नहीं देती, तो सत्ता में लौटने पर वाईएसआर कांग्रेस यह वादा पूरा करेगी। इस हादसे ने आंध्र प्रदेश में तटीय आपदा प्रबंधन और मछुआरों की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिस्टम की संरचनात्मक विफलता का संकेत है। सरकारी समिति की रिपोर्ट और परिजनों के कॉल रिकॉर्ड के बीच का विरोधाभास स्वतंत्र जांच की मांग करता है। जगन की ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है, लेकिन असली सवाल यह है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए कौन-सा जवाबदेही तंत्र बनेगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशाखापट्टनम नौका हादसे में क्या हुआ?
गंगावरम पोर्ट से करीब 10 मील दूर समुद्र में सात मछुआरों को ले जा रही नाव पलट गई, जिसमें 6 मछुआरों की मौत हो गई। एकमात्र बचे व्यक्ति चिन्ना को एक चीनी जहाज ने बचाया।
जगन मोहन रेड्डी ने कितने मुआवजे की मांग की है?
जगन मोहन रेड्डी ने मांग की है कि नायडू सरकार प्रत्येक मृतक मछुआरे के परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए ₹10 लाख अपर्याप्त हैं।
सरकार पर लापरवाही का आरोप क्यों लगाया जा रहा है?
परिजनों के कॉल रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 4 जुलाई की रात ही एसओएस संदेश भेजे थे, लेकिन सरकारी समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि जानकारी 5 जुलाई सुबह 5 बजे मिली। जगन ने आरोप लगाया कि कलेक्टर और अधिकारियों को बार-बार फोन करने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।
वाईएसआरसीपी ने पीड़ित परिवारों के लिए क्या घोषणा की?
वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी ने मृतक मछुआरों के परिवारों और बचे हुए व्यक्ति चिन्ना को ₹7-7 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
क्या मौजूदा सरकार ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की?
जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, 14 जुलाई तक न मुख्यमंत्री और न ही मत्स्य पालन या आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्रियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी।
राष्ट्र प्रेस
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