क्या चंद्रबाबू नायडू की सरकार में फसलों की कीमतें गिर गई हैं? - जगन मोहन रेड्डी

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क्या चंद्रबाबू नायडू की सरकार में फसलों की कीमतें गिर गई हैं? - जगन मोहन रेड्डी

सारांश

जगन मोहन रेड्डी ने नायडू की सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने फसलों की कीमतों में गिरावट और सरकारी सहायता की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। क्या यह किसानों के लिए संकट का समय है?

Key Takeaways

  • नायडू सरकार के शासन में फसलों की कीमतें गिरी हैं।
  • किसानों को सरकारी सहायता की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • जगन मोहन रेड्डी ने नायडू पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • किसान अब ब्लैक मार्केट से खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं।
  • सरकार ने किसानों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

अमरावती, 23 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नायडू के 18 महीने के शासन में फसलों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।

जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि नायडू की सरकार में धान, मक्का, केला, नारियल, कपास, दालें, बाजरा, मिर्च, तंबाकू, प्याज, टमाटर, कोको, गन्ना, आम और कई अन्य फसलों की कीमतें गिर गई हैं, जिससे किसान अत्यधिक परेशान हैं। सरकारी मदद की कमी के कारण अब किसानों को अपनी ही फसल को जोतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि संकट को मानने के बजाय नायडू 'रायतन्ना-मीकोसम' जैसे प्रचार के माध्यम से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं और किसानों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहे हैं कि उनकी समस्याओं के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि वे 24 से 29 नवंबर के बीच और फिर 3 दिसंबर को होने वाले 'रायतन्ना-मीकोसम' आउटरीच कार्यक्रम में सक्रिय भाग लेंगे।

जगन ने सवाल उठाया कि नायडू कैसे तीन चार्टर्ड फ्लाइट्स, छह हेलीकॉप्टर, विदेश यात्रा, हैदराबाद की वीकेंड ट्रिप, राजनीतिक प्रतिशोध के मामले, महंगे वकील और पेड प्रचार पर करोड़ों खर्च कर सकते हैं, लेकिन किसानों की मदद के लिए मामूली फंड भी जारी नहीं करते।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 18 महीनों में कीमतों में गिरावट के बावजूद, सरकार ने स्थिरता के लिए एक भी रुपया मंजूर नहीं किया।

जगन ने याद दिलाया कि आंध्र प्रदेश में लगभग 16 प्राकृतिक आपदाएं आईं, लेकिन नायडू ने एक बार भी सब्सिडी नहीं दी, मुआवजे की घोषणा नहीं की, या किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन वास्तविकता में कुछ लागू नहीं होता, जैसा कि मिर्च, तंबाकू, आम और प्याज के किसानों के मामले में देखा गया है।

जगन मोहन रेड्डी ने नायडू पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान स्थापित सभी सुरक्षा प्रणाली, मुफ्त फसल बीमा, आरबीके, ई-क्रॉप, सीएमएपीपी और डोरस्टेप खरीद को जानबूझकर खत्म कर दिया।

फ्री फसल बीमा समाप्त कर दिया गया, और सरकार के पास चक्रवात और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लाखों किसानों के लिए कोई उपाय नहीं है, जो बीमा कवरेज से बाहर हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार पर अभी भी 600 करोड़ रुपए की इनपुट सब्सिडी बकाया है और यह स्पष्ट नहीं है कि हालिया तूफान के प्रभावित किसानों को राहत कब मिलेगी।

नायडू ने 100 करोड़ रुपए का वादा किया था। पीएम-किसान के अलावा, अन्नदाता सुखी भव योजना के तहत हर साल 20,000 रुपए दिए जाते थे, लेकिन दो साल में 40,000 रुपए में से केवल 10,000 रुपए ही दिए गए।

वाईएसआरसीपी नेता ने कहा कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि किसान अब ब्लैक मार्केट से खाद खरीदने और जीविका के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि आंध्र प्रदेश में कृषि संकट की स्थिति गंभीर है। किसानों की समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है, और सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

क्या चंद्रबाबू नायडू की सरकार में फसलों की कीमतें गिरी हैं?
जी हां, जगन मोहन रेड्डी ने कहा है कि नायडू के 18 महीने के शासन में फसलों की कीमतों में भारी गिरावट आई है।
किसानों को किस प्रकार की समस्याएं आ रही हैं?
किसानों को कीमतों में गिरावट और सरकारी सहायता की कमी के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने किसानों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, सरकार ने पिछले 18 महीनों में किसानों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
नायडू ने किसानों के लिए क्या वादे किए हैं?
नायडू ने 100 करोड़ रुपए का वादा किया था, लेकिन केवल 10,000 रुपए ही दिए गए हैं।
किसान अब किन उपायों पर निर्भर हैं?
किसान अब खाद के लिए ब्लैक मार्केट और बिचौलियों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
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