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जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम में लापता मछुआरों के परिजनों से मिलेंगे

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जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम में लापता मछुआरों के परिजनों से मिलेंगे

सारांश

विशाखापत्तनम नाव हादसे में छह मछुआरे अभी भी लापता हैं और बचाव अभियान 8 जुलाई को रोक दिया गया। अब पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को पीड़ित परिवारों से मिलेंगे, जबकि विपक्ष 20 घंटे की बचाव देरी और विभागीय तालमेल की कमी पर सरकार को घेर रहा है।

मुख्य बातें

जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम के जब्बारपेट में लापता मछुआरों के परिजनों से मिलेंगे।
4 जुलाई को गंगावरम तट से 10 नॉटिकल मील दूर नाव पलटने से सात में से छह मछुआरे लापता हैं।
बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुँचने में करीब 20 घंटे लगे; अभियान 8 जुलाई को रोका गया।
एकमात्र बचे कारी चिन्ना को मर्चेंट जहाज के चालक दल ने बचाया और 6 जुलाई को तट पर लाया।
राज्य सरकार ने छह परिवारों को प्रत्येक ₹10 लाख की अनुग्रह राशि दी।
वाईएसआरसीपी ने कोस्ट गार्ड, नेवी, मरीन पुलिस, मत्स्य और राजस्व विभाग के बीच तालमेल की कमी को जिम्मेदार ठहराया।

पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम का दौरा करेंगे, जहाँ वे हाल ही में हुई नाव दुर्घटना में लापता हुए छह मछुआरों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना देंगे। 4 जुलाई को गंगावरम तट से लगभग 10 नॉटिकल मील दूर एक मशीनीकृत नाव के पलट जाने से यह हादसा हुआ था, जिसमें सात में से छह मछुआरों के मारे जाने की आशंका है।

दौरे का कार्यक्रम

वाईएसआरसीपी विशाखापत्तनम जिला अध्यक्ष के.के. राजू ने बताया कि जगन मोहन रेड्डी सुबह 10:30 बजे विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पहुँचेंगे और सीधे विशाखापत्तनम दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के जब्बारपेट में लापता मछुआरों के घरों पर जाएंगे। वे हादसे में अकेले बचे कारी चिन्ना और उनके परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

मछुआरे 1 जुलाई को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में निकले थे। तट पर लौटते समय नाव पलट गई। तट से मात्र आठ नॉटिकल मील दूर हुए इस हादसे में बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुँचने में करीब 20 घंटे लग गए। कारी चिन्ना को एक मर्चेंट जहाज के चालक दल ने बचाया और उन्हें 6 जुलाई को तट पर लाया गया। भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड द्वारा चार दिन तक चले खोज एवं बचाव अभियान के बाद भी शेष मछुआरों का पता नहीं चला और 8 जुलाई को अभियान रोक दिया गया।

सरकार की आलोचना

के.के. राजू ने राज्य सरकार पर इस त्रासदी पर प्रभावी प्रतिक्रिया न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद कोस्ट गार्ड, नेवी, मरीन पुलिस, मत्स्य विभाग और राजस्व विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण बचाव में देरी हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लापता मछुआरों का पता चलने से पहले ही बचाव अभियान क्यों रोक दिया गया।

राजू ने इस बात पर भी निराशा जताई कि संयुक्त विशाखापत्तनम जिले का प्रतिनिधित्व करने वाली गृह मंत्री वी. अनीता पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, आईटी मंत्री नारा लोकेश और कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू की भी इस त्रासदी पर चुप रहने के लिए आलोचना की।

मुआवजे पर विवाद

राजू ने राज्य सरकार पर कारी चिन्ना को बचाने का झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने प्रभावित परिवारों की बात सुने बिना ही मुआवजे के चेक बाँट दिए। राज्य सरकार ने छह लापता मछुआरों के परिवारों को प्रत्येक को ₹10 लाख की अनुग्रह राशि दी है।

आगे की स्थिति

जगन मोहन रेड्डी का यह दौरा विपक्ष की ओर से सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि बचाव अभियान की समाप्ति और मुआवजे के वितरण को लेकर सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं, और पीड़ित परिवार अपने परिजनों की खोज जारी रखने की माँग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

समुद्री आपदा प्रबंधन में गहरी खामियों की ओर इशारा करता है। यह सवाल कि तट से मात्र आठ नॉटिकल मील दूर हुए हादसे में इतनी देरी क्यों हुई, केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संस्थागत जवाबदेही का है। ₹10 लाख की अनुग्रह राशि और जल्दबाजी में बाँटे गए चेक उस दर्द का जवाब नहीं हैं जब परिवारों को यह भी नहीं पता कि उनके परिजन जीवित हैं या नहीं। विपक्ष की आलोचना वाजिब है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या इस हादसे के बाद तटीय बचाव तंत्र में ढाँचागत सुधार होंगे या यह भी एक और राजनीतिक दौरे तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशाखापत्तनम नाव दुर्घटना कब और कहाँ हुई?
यह हादसा 4 जुलाई को विशाखापत्तनम के गंगावरम तट से लगभग 10 नॉटिकल मील दूर हुआ, जब सात मछुआरों को ले जा रही एक मशीनीकृत नाव पलट गई। मछुआरे 1 जुलाई को मछली पकड़ने निकले थे और तट पर लौटते समय यह दुर्घटना हुई।
लापता मछुआरों की खोज का क्या हुआ?
भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने चार दिन तक खोज और बचाव अभियान चलाया, लेकिन छह मछुआरों का पता नहीं चल सका। 8 जुलाई को अभियान रोक दिया गया। एकमात्र बचे कारी चिन्ना को एक मर्चेंट जहाज के चालक दल ने बचाया और 6 जुलाई को तट पर लाया गया।
जगन मोहन रेड्डी विशाखापत्तनम क्यों जा रहे हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी 14 जुलाई को विशाखापत्तनम के जब्बारपेट में लापता मछुआरों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना देंगे। वे हादसे में अकेले बचे कारी चिन्ना और उनके परिवार से भी मुलाकात करेंगे।
वाईएसआरसीपी ने राज्य सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी ने कोस्ट गार्ड, नेवी, मरीन पुलिस, मत्स्य और राजस्व विभाग के बीच तालमेल की कमी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बचाव अभियान समय से पहले रोका गया, गृह मंत्री पीड़ितों से नहीं मिलीं और मंत्रियों ने परिवारों की बात सुने बिना ही मुआवजे के चेक बाँट दिए।
राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों को क्या मुआवजा दिया?
आंध्र प्रदेश सरकार ने छह लापता मछुआरों के परिवारों को प्रत्येक को ₹10 लाख की अनुग्रह राशि दी है। हालाँकि, विपक्ष का आरोप है कि यह राशि परिवारों की भावनाओं की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में बाँटी गई।
राष्ट्र प्रेस
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