विंबलडन फाइनल 2026: वैभव सूर्यवंशी पहुंचे लंदन, जोकोविच को बताया अपना आदर्श
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने 13 जुलाई 2026 को विंबलडन का अपना पहला अनुभव लिया, जब वे पुरुष एकल फाइनल देखने लंदन पहुंचे। उनके साथ भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा और पूर्व दिग्गज युवराज सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान वैभव ने खुलासा किया कि वे सर्बिया के महान टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच के प्रबल प्रशंसक हैं।
वैभव के पसंदीदा टेनिस खिलाड़ी
जियोस्टार से बातचीत में वैभव सूर्यवंशी ने कहा, 'मैं पिछले 4-5 वर्षों से टेनिस को फॉलो कर रहा हूं। मैं नडाल और जोकोविच को बहुत देखता था। अब मैं जोकोविच का बहुत बड़ा फैन हूं, लेकिन ये दोनों ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें मैंने हमेशा करीब से फॉलो किया है।' मौजूदा पीढ़ी में उनकी पसंद कार्लोस अल्काराज हैं, हालांकि स्पेनिश खिलाड़ी इस साल विंबलडन में नहीं खेल रहे।
सिनर पर दांव
रविवार के पुरुष एकल फाइनल में इटली के जानिक सिनर और जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच खिताबी मुकाबला हुआ। वैभव ने कहा, 'जब मैंने टूर्नामेंट फॉलो किया, तो मैं जानिक सिनर के दबदबे से बहुत प्रभावित हुआ। इसलिए उम्मीद है कि आज वह फाइनल जीतेंगे।' यह टिप्पणी इस बात की गवाह है कि भारत के युवा क्रिकेटर भी वैश्विक खेलों की बारीकियों पर नज़र रखते हैं।
अभिषेक शर्मा का विंबलडन सपना
अभिषेक शर्मा ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, 'असल में विंबलडन आना मेरे सपनों में से एक था। फाइनल वाले दिन यहां होना इसे और भी खास बनाता है।' उन्होंने राफेल नडाल को अपना आदर्श बताया और कहा, 'उनकी काम करने की लगन, उनका रवैया और जिस तरह से उन्होंने इतने वर्षों तक इस खेल पर दबदबा बनाए रखा — वह निश्चित रूप से ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें मैं बहुत पसंद करता हूं।'
क्रिकेट और टेनिस का जुड़ाव
जब वैभव से पूछा गया कि वे डबल्स टेनिस पार्टनर के रूप में किसे चुनेंगे, तो उन्होंने बिना झिझक अभिषेक शर्मा का नाम लिया। वैभव ने कहा, 'वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मेरे ओपनिंग पार्टनर हैं। मुझे उनके साथ बैटिंग करने में बहुत मजा आता है, इसलिए मैं उन्हें ही अपने डबल्स टेनिस पार्टनर के तौर पर भी चुनूंगा।' अभिषेक ने भी अल्काराज और सिनर की तारीफ करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों को देखना युवा क्रिकेटरों को प्रेरित करता है।
युवा प्रतिभा का वैश्विक नज़रिया
वैभव सूर्यवंशी की विंबलडन यात्रा यह दर्शाती है कि भारत की नई क्रिकेट पीढ़ी खेल की सीमाओं से परे जाकर वैश्विक खेल संस्कृति से जुड़ रही है। 15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके वैभव का यह दौरा उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को उजागर करता है। आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के ये युवा चेहरे मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह अपनी छाप छोड़ते रहेंगे।