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कर्नाटक सूखा संकट: CM डी.के. शिवकुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, केंद्रीय टीम की माँग

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कर्नाटक सूखा संकट: CM डी.के. शिवकुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, केंद्रीय टीम की माँग

सारांश

कर्नाटक में 30% वर्षा की कमी, 18 जिले सूखे की चपेट में और जलाशय मात्र 34% भरे — CM शिवकुमार ने PM मोदी से केंद्रीय टीम भेजने की माँग की है। खरीफ बुवाई लक्ष्य का एक-तिहाई भी पूरा नहीं हुआ, और अरहर उत्पादन में गिरावट से राष्ट्रीय दाल आपूर्ति पर भी संकट मँडरा रहा है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 14 जुलाई 2025 को PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल केंद्रीय सूखा आकलन टीम भेजने की माँग की।
11 जुलाई 2025 तक कर्नाटक में सामान्य 292 मिमी के मुकाबले केवल 203 मिमी वर्षा — सामान्य से 30% कम।
राज्य के 31 में से 18 जिले और 240 में से 141 तालुके वर्षा की कमी से प्रभावित।
खरीफ बुवाई: 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 28.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई।
14 प्रमुख जलाशयों में 10 जुलाई तक केवल 303 टीएमसी जल — कुल क्षमता का 34% ।
कर्नाटक देश में अरहर (तूर) दाल का प्रमुख उत्पादक; उत्पादन घटने पर राष्ट्रीय दाल कीमतों पर असर की आशंका।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 14 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में गहराते सूखे के हालात का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए तत्काल एक विशेषज्ञ केंद्रीय टीम भेजने की माँग की है। पत्र में उन्होंने रेखांकित किया कि सामान्य से 30 प्रतिशत कम वर्षा के कारण कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण आजीविका गंभीर संकट में हैं।

वर्षा की स्थिति और प्रभावित क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि 11 जुलाई 2025 तक कर्नाटक में सामान्य 292 मिमी के मुकाबले केवल 203 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। राज्य के 31 में से 18 जिले और 240 में से 141 तालुके सामान्य से कम या अत्यधिक कम बारिश की चपेट में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की बुवाई का सबसे अहम दौर चल रहा है।

मानसून के देर से आगमन और अनियमित वितरण के कारण खरीफ बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब तक केवल 28.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो सकी है, जबकि इस मौसम का निर्धारित लक्ष्य 84.10 लाख हेक्टेयर था — यानी लक्ष्य का मात्र एक-तिहाई।

जल संकट की गंभीरता

10 जुलाई 2025 तक राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों में केवल 303 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) जल भंडार शेष है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का महज 34 प्रतिशत है। शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने उपलब्ध जल को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर असर

पत्र में शिवकुमार ने इस संकट को राज्य की सीमाओं से परे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में रखा। उन्होंने बताया कि कर्नाटक देश में दालों, विशेषकर अरहर (तूर) का प्रमुख उत्पादक राज्य है। यदि उत्पादन में गिरावट आती है तो इसका प्रभाव केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा — पूरे देश में दालों की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में दालों की कीमतें पहले से ही दबाव में रही हैं।

राज्य सरकार के उठाए कदम

शिवकुमार ने केंद्र को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए सक्रिय है। किसानों के लिए फसल संबंधी सलाह (क्रॉप एडवाइजरी) जारी की गई है, जिला-वार आकस्मिक कार्ययोजनाएँ तैयार की गई हैं और जलाशय प्रबंधन में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

केंद्र से क्या माँग की गई

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ दल राज्य भेजे ताकि सूखे की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके और राहत कार्यों को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि समय पर केंद्रीय सहायता न केवल राज्य सरकार के प्रयासों को मजबूती देगी, बल्कि संकट से जूझ रहे किसानों का मनोबल भी बढ़ाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार केंद्र की BJP सरकार से राहत माँग रही है — ऐसे में केंद्रीय टीम के भेजे जाने की गति और उसके बाद मिलने वाली वित्तीय सहायता की राशि ही असली कसौटी होगी। खरीफ बुवाई का लक्ष्य मात्र एक-तिहाई पूरा होना और अरहर उत्पादन पर खतरा — ये संकेत बताते हैं कि यदि अगले कुछ हफ्तों में मानसून नहीं सुधरा, तो यह संकट केवल कर्नाटक का नहीं, राष्ट्रीय खाद्य मूल्य स्थिरता का भी मुद्दा बन सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सूखे की मौजूदा स्थिति क्या है?
11 जुलाई 2025 तक कर्नाटक में सामान्य 292 मिमी के मुकाबले केवल 203 मिमी वर्षा हुई है — यानी 30% की कमी। राज्य के 31 में से 18 जिले और 240 में से 141 तालुके सामान्य से कम बारिश से प्रभावित हैं।
CM शिवकुमार ने PM मोदी से क्या माँग की है?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 14 जुलाई 2025 को PM मोदी को पत्र लिखकर तत्काल एक विशेषज्ञ केंद्रीय टीम भेजने की माँग की है, जो जमीनी स्तर पर सूखे की स्थिति का आकलन कर सके और राहत कार्यों में तेज़ी लाने में मदद करे।
कर्नाटक में खरीफ बुवाई पर क्या असर पड़ा है?
इस खरीफ सीजन में 84.10 लाख हेक्टेयर बुवाई का लक्ष्य था, लेकिन अब तक केवल 28.36 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है। मानसून के देर से आने और अनियमित वितरण को इसका प्रमुख कारण बताया गया है।
कर्नाटक के जलाशयों में पानी की क्या स्थिति है?
10 जुलाई 2025 तक राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों में केवल 303 टीएमसी जल उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का मात्र 34% है। राज्य सरकार ने उपलब्ध जल को पेयजल आपूर्ति के लिए प्राथमिकता से सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
कर्नाटक के सूखे का राष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति पर क्या असर हो सकता है?
कर्नाटक देश में अरहर (तूर) दाल का प्रमुख उत्पादक राज्य है। CM शिवकुमार के अनुसार, यदि उत्पादन में गिरावट आई तो इसका असर पूरे देश में दालों की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है, जो पहले से ही दबाव में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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