कर्नाटक सूखा संकट: CM डी.के. शिवकुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, केंद्रीय टीम की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 14 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में गहराते सूखे के हालात का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए तत्काल एक विशेषज्ञ केंद्रीय टीम भेजने की माँग की है। पत्र में उन्होंने रेखांकित किया कि सामान्य से 30 प्रतिशत कम वर्षा के कारण कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण आजीविका गंभीर संकट में हैं।
वर्षा की स्थिति और प्रभावित क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि 11 जुलाई 2025 तक कर्नाटक में सामान्य 292 मिमी के मुकाबले केवल 203 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। राज्य के 31 में से 18 जिले और 240 में से 141 तालुके सामान्य से कम या अत्यधिक कम बारिश की चपेट में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की बुवाई का सबसे अहम दौर चल रहा है।
मानसून के देर से आगमन और अनियमित वितरण के कारण खरीफ बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब तक केवल 28.36 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो सकी है, जबकि इस मौसम का निर्धारित लक्ष्य 84.10 लाख हेक्टेयर था — यानी लक्ष्य का मात्र एक-तिहाई।
जल संकट की गंभीरता
10 जुलाई 2025 तक राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों में केवल 303 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट) जल भंडार शेष है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का महज 34 प्रतिशत है। शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने उपलब्ध जल को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर असर
पत्र में शिवकुमार ने इस संकट को राज्य की सीमाओं से परे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में रखा। उन्होंने बताया कि कर्नाटक देश में दालों, विशेषकर अरहर (तूर) का प्रमुख उत्पादक राज्य है। यदि उत्पादन में गिरावट आती है तो इसका प्रभाव केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा — पूरे देश में दालों की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में दालों की कीमतें पहले से ही दबाव में रही हैं।
राज्य सरकार के उठाए कदम
शिवकुमार ने केंद्र को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए सक्रिय है। किसानों के लिए फसल संबंधी सलाह (क्रॉप एडवाइजरी) जारी की गई है, जिला-वार आकस्मिक कार्ययोजनाएँ तैयार की गई हैं और जलाशय प्रबंधन में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
केंद्र से क्या माँग की गई
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ दल राज्य भेजे ताकि सूखे की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके और राहत कार्यों को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि समय पर केंद्रीय सहायता न केवल राज्य सरकार के प्रयासों को मजबूती देगी, बल्कि संकट से जूझ रहे किसानों का मनोबल भी बढ़ाएगी।