धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को एंटी से इनकार किया, तीसरे हफ्ते होगी अंतिम सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
धार भोजशाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को मुस्लिम पक्ष की स्टेटस को एंटी (यथापूर्व स्थिति) बहाल करने की माँग अस्वीकार कर दी और एक अंतरिम व्यवस्था के तहत शुक्रवार को परिसर की खाली जगह पर नमाज की अनुमति दी। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि मामले की अंतिम सुनवाई तीसरे हफ्ते में होगी।
मुख्य घटनाक्रम
अधिवक्ता वरुण सिन्हा के अनुसार, मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल चार विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। गौरतलब है कि निचली अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2023 के आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके कारण हिंदू पक्ष ने स्टेटस को एंटी का विरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है। कोर्ट ने कहा कि जब प्रशासन की ओर से अंतरिम आदेश पहले से लागू हो, तो कोई भी पक्ष अलग से अंतरिम राहत की माँग नहीं कर सकता और न ही आरोप लगा सकता है। मुस्लिम पक्ष की यह दलील कि कार्यवाही जल्दबाजी में हो रही है, कोर्ट ने स्वीकार नहीं की।
अंतरिम व्यवस्था का विवरण
कोर्ट की अंतरिम व्यवस्था के तहत मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर की खाली जगह पर शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष की माँग थी कि उन्हें परिसर के अंदर नमाज पढ़ने की अनुमति मिले, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। इसके अतिरिक्त, डायरेक्शन नंबर 7 के अंतर्गत भारत सरकार और ASI को परिसर के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है।
बदलाव के लिए केंद्र की अनुमति अनिवार्य
अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने बताया कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बिना भोजशाला परिसर में कोई बुनियादी बदलाव नहीं किया जा सकता। यदि कोई परिवर्तन आवश्यक हो, तो पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सरकार और प्रशासन ने सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए पहले से कई व्यवस्थाएँ की हुई हैं।
आगे क्या होगा
याचिकाकर्ता जितेंद्र बिसेन की ओर से पेश अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में मामले की मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे विवाद की गंभीरता को देखते हुए इसके निस्तारण का आदेश दिया है और अंतिम सुनवाई तीसरे हफ्ते निर्धारित की गई है।