14 जुलाई 2026
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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, एएसआई और हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किए; नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान का निर्देश

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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, एएसआई और हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किए; नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान का निर्देश

सारांश

भोजशाला विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे पर है। हाईकोर्ट ने परिसर को प्राचीन हिंदू मंदिर घोषित किया, सुप्रीम कोर्ट ने रोक से इनकार किया — लेकिन नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का निर्देश देकर संतुलन साधने की कोशिश की। सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा: ऐसा कोई आदेश नहीं जो कानून-व्यवस्था को खतरे में डाले।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार , एएसआई , हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किए।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई 2026 के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक नहीं लगाई; भोजशाला में हिंदू पूजा जारी रहेगी।
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच परिसर के निकट वैकल्पिक स्थान पर नमाज की व्यवस्था की जाए।
एएसआई बिना न्यायालय की अनुमति के भोजशाला परिसर के ढांचे में कोई बदलाव नहीं करेगा।
सीजेआई सूर्यकांत ने मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए 10-20 दिनों में अगली सुनवाई का संकेत दिया।
हाईकोर्ट ने 242 पन्नों के फैसले में एएसआई की पुरातात्विक रिपोर्ट के आधार पर परिसर को माँ वाग्देवी का प्राचीन मंदिर घोषित किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस तथा अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किए। अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है, जिसका अर्थ है कि भोजशाला में हिंदू पूजा पहले की तरह जारी रहेगी।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर के निकट एक उपयुक्त खुली जगह पर जुमे की नमाज अदा करने की व्यवस्था की जाए। अदालत ने संबंधित पक्षों से ऐसे स्थान की पहचान करने को कहा जो विवादित परिसर से बाहर हो।

पीठ ने यह भी आदेश दिया कि एएसआई बिना न्यायालय की अनुमति के भोजशाला परिसर के ढांचे में कोई बदलाव नहीं करेगा। मामले को शीघ्र अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का संकेत देते हुए सीजेआई ने कहा कि अगले 10 से 20 दिनों के भीतर एक सुविधाजनक तारीख तय की जाएगी।

दोनों पक्षों के तर्क

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और हुजैफा अहमदी ने पैरवी की। सिंघवी ने तर्क दिया कि सदियों से इस स्थल पर नमाज अदा होने के साक्ष्य मौजूद हैं और अंग्रेजों के समय से ही शुक्रवार को नमाज तथा वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा की व्यवस्था चली आ रही है। अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद से प्रत्येक शुक्रवार की नमाज रोक दी गई है, जो उनके अनुसार अनुचित है।

दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विवादित परिसर में नमाज फिर से शुरू करने का विरोध करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन के हस्तक्षेप से स्थिति अभी शांत है।

सर्वोच्च न्यायालय की सावधानी भरी टिप्पणी

सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए जो कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाले या जनता में गलत संदेश जाए। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा मामला है जहां दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए। पीठ ने रेखांकित किया कि एएसआई की व्यवस्था के बावजूद वहाँ कठिनाइयाँ रही हैं और इसलिए अंतिम निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर गहन विचार आवश्यक है।

हाईकोर्ट का फैसला: पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को 242 पन्नों के अपने फैसले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर को माँ वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित किया था। हाईकोर्ट ने एएसआई की पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला था कि वर्तमान विवादित ढांचा पूर्व में मौजूद हिंदू मंदिरों के अवशेषों पर बनाया गया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एएसआई के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसके तहत मुस्लिम समाज को प्रत्येक शुक्रवार नमाज की अनुमति दी गई थी।

गौरतलब है कि यह विवाद दशकों पुराना है और इसे भारत के सबसे संवेदनशील धार्मिक-ऐतिहासिक विवादों में गिना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय का अगला निर्णय इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का निर्देश देना — वह भारत के धार्मिक-ऐतिहासिक विवादों में न्यायपालिका की परंपरागत सतर्कता को दर्शाता है। सीजेआई का यह कहना कि 'कानून-व्यवस्था पर असर डालने वाला आदेश नहीं होगा', अदालत की प्राथमिकताओं को उजागर करता है — पर यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या इस सावधानी में कहीं दीर्घकालिक न्याय की कीमत तो नहीं चुकानी पड़ रही। ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मामलों के साथ यह विवाद भारत में धर्म-स्थल कानून की सीमाओं और न्यायिक व्याख्या की जटिलता को एक बार फिर केंद्र में ला देता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है, जिसे हिंदू पक्ष माँ वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। दशकों से दोनों समुदाय इस स्थल पर अपने-अपने धार्मिक अधिकारों का दावा करते आए हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला पर क्या फैसला सुनाया था?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को 242 पन्नों के फैसले में भोजशाला परिसर को माँ वाग्देवी का प्राचीन मंदिर घोषित किया और एएसआई की पुरातात्विक रिपोर्ट को आधार मानते हुए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका स्वीकार की। हाईकोर्ट ने मुस्लिम समाज को शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने वाले एएसआई के आदेश को भी रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 की सुनवाई में क्या आदेश दिए?
सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे भोजशाला में हिंदू पूजा जारी रहेगी। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच परिसर के निकट एक वैकल्पिक खुली जगह पर नमाज की व्यवस्था की जाए और एएसआई बिना न्यायालय की अनुमति के परिसर के ढांचे में कोई बदलाव नहीं करेगा।
सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भोजशाला विवाद को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए जो कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाले। उन्होंने संकेत दिया कि मामले को 10 से 20 दिनों के भीतर अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
अब भोजशाला मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, एएसआई और हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं और अगले 10 से 20 दिनों में अंतिम सुनवाई की तारीख तय करने का संकेत दिया है। तब तक हाईकोर्ट का फैसला प्रभावी रहेगा और नमाज के लिए परिसर के निकट वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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