भोजशाला फैसले पर मुस्लिम पक्ष में मायूसी, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय में गहरी निराशा देखी जा रही है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद समेत कई मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। हालाँकि, कुछ मुस्लिम संगठनों ने संयम बरतने और कानूनी मार्ग अपनाने की अपील भी की है।
मुख्य घटनाक्रम
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को आधार मानते हुए भोजशाला परिसर के संबंध में निर्णय सुनाया। यह विवाद दशकों पुराना है — जब से परिसर ASI के अधीन आया, तब से दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि अब तक की व्यवस्था के अनुसार परिसर में मंगलवार को हिंदू पूजा और जुमे (शुक्रवार) को नमाज़ अदा की जाती थी।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, 'यह मामला बहुत पुराना है और काफी समय से इस पर विवाद चल रहा था। जब से यह ASI के हाथ में गया है, तब से ही विवाद चल रहा है। आज हाई कोर्ट का एक फैसला आया है, जिसने ASI को आधार मानकर दूसरे पक्ष को दे दिया है।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम सभी मिलकर इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आने तक प्रशासन को इसे किसी और को नहीं सौंपना चाहिए।' उन्होंने बाबरी मस्जिद मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय पहले भी बड़ा दिल दिखा चुका है।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया का रुख
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि इस फैसले से मुस्लिम समुदाय में मायूसी ज़रूर है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा। कोर्ट के फैसले की हम सभी इज़्ज़त करते हैं।'
सूफी फाउंडेशन की संयम की अपील
भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने मुस्लिम समुदाय से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा, 'सच्चा मुसलमान विवादित जगह पर नमाज़ नहीं पढ़ेगा। बाबरी मस्जिद फैसले की तरह हमें इसे भी स्वीकार करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कोर्ट के खिलाफ बयानबाज़ी नहीं करनी चाहिए और राजनीतिक लोगों के बहकावे में नहीं आना चाहिए — अगर कोई कदम उठाना है तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएँ।'
आगे क्या होगा
मुस्लिम पक्ष के वकीलों और नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में जाएगा, जहाँ इस पर अंतिम निर्णय अपेक्षित है। फिलहाल, समुदाय के भीतर दो धाराएँ स्पष्ट हैं — एक जो कानूनी लड़ाई जारी रखने की पक्षधर है, और दूसरी जो न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए शांति बनाए रखने की अपील कर रही है।