पॉक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने पर साइबराबाद पुलिस की कार्रवाई, बंदी भागीरथ मामले में कई अकाउंट्स पर केस दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
साइबराबाद पुलिस ने 15 मई 2026 को उन कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के पुत्र बंदी भागीरथ के विरुद्ध दर्ज पॉक्सो मामले की पीड़िता के फोटो, वीडियो और पहचान से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित की। यह कार्रवाई मेडचल-मलकाजगिरी जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर की गई है।
मामला कहाँ और कैसे दर्ज हुआ
पुलिस के अनुसार, यह मामला पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है — वही थाना जहाँ 8 मई को भागीरथ के खिलाफ मूल पॉक्सो केस दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स ने पीड़िता और उसके माता-पिता की तस्वीरें, वीडियो तथा पहचान उजागर करने वाली सामग्री प्रसारित की।
पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन के एसएचओ के. विजय वर्धन ने बताया कि इस मामले में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 72(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की तकनीकी कार्रवाई
पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स की पहचान कर उनके यूआरएल संबंधित एजेंसियों को भेज दिए हैं, ताकि इन अकाउंट्स को संचालित करने वालों का पता लगाकर कानूनी कार्रवाई की जा सके। एसएचओ विजय वर्धन ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की पहचान उजागर करना गंभीर कानूनी अपराध है और इससे पीड़िता को गहरा मानसिक आघात पहुँचता है।
मूल पॉक्सो मामले की पृष्ठभूमि
8 मई को एक 17 वर्षीय लड़की की शिकायत पर भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुईनाबाद स्थित एक फार्महाउस में उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। प्रारंभ में पॉक्सो एक्ट की धारा 11 और 12 तथा बीएनएस की धारा 74 और 75 के तहत केस दर्ज हुआ था। बाद में पुलिस ने एफआईआर में पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल) के साथ धारा 6 भी जोड़ी, जो गंभीर यौन उत्पीड़न से संबंधित है और जिसके तहत 20 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
भागीरथ की पलट शिकायत और हाई कोर्ट याचिका
25 वर्षीय बंदी भागीरथ ने करीमनगर में एक पलट शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर ₹5 करोड़ की माँग की थी। इसके अतिरिक्त, भागीरथ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर पॉक्सो केस रद्द करने और अग्रिम जमानत की माँग की है। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के बाद अगली तारीख अगले सप्ताह के लिए तय की है और अंतरिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।
आगे क्या होगा
पुलिस अब सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों की पहचान के लिए तकनीकी जाँच जारी रखेगी। तेलंगाना उच्च न्यायालय में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में भागीरथ की अग्रिम जमानत और अंतरिम राहत पर फैसला आने की संभावना है। यह मामला राज्य में पॉक्सो पीड़ितों की गोपनीयता और सोशल मीडिया की जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।