पॉक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने पर साइबराबाद पुलिस की कार्रवाई, बंदी भागीरथ मामले में कई अकाउंट्स पर केस दर्ज

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पॉक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने पर साइबराबाद पुलिस की कार्रवाई, बंदी भागीरथ मामले में कई अकाउंट्स पर केस दर्ज

सारांश

बंदी भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो मामले में पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने वाले अकाउंट्स पर साइबराबाद पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया। मूल मामले में अब 20 साल की सजा वाली धारा 6 भी जुड़ चुकी है।

मुख्य बातें

साइबराबाद पुलिस ने 15 मई 2026 को पॉक्सो पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम धारा 74 , बीएनएस धारा 72(1) और पॉक्सो धारा 23 के तहत केस दर्ज किया।
मामला मेडचल-मलकाजगिरी जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की शिकायत पर पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ।
मूल पॉक्सो केस 8 मई को 17 वर्षीय पीड़िता की शिकायत पर बंदी भागीरथ के खिलाफ दर्ज हुआ था; बाद में पॉक्सो धारा 5(एल) और 6 जोड़ी गई, जिसमें 20 वर्ष या अधिक की सजा का प्रावधान है।
25 वर्षीय भागीरथ ने करीमनगर में पलट शिकायत दर्ज कर ₹5 करोड़ की कथित जबरन वसूली का आरोप लगाया।
तेलंगाना उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका पर अंतरिम आदेश सुरक्षित; अगली सुनवाई अगले सप्ताह।

साइबराबाद पुलिस ने 15 मई 2026 को उन कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के पुत्र बंदी भागीरथ के विरुद्ध दर्ज पॉक्सो मामले की पीड़िता के फोटो, वीडियो और पहचान से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित की। यह कार्रवाई मेडचल-मलकाजगिरी जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर की गई है।

मामला कहाँ और कैसे दर्ज हुआ

पुलिस के अनुसार, यह मामला पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है — वही थाना जहाँ 8 मई को भागीरथ के खिलाफ मूल पॉक्सो केस दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स ने पीड़िता और उसके माता-पिता की तस्वीरें, वीडियो तथा पहचान उजागर करने वाली सामग्री प्रसारित की।

पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन के एसएचओ के. विजय वर्धन ने बताया कि इस मामले में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 72(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत केस दर्ज किया गया है।

पुलिस की तकनीकी कार्रवाई

पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स की पहचान कर उनके यूआरएल संबंधित एजेंसियों को भेज दिए हैं, ताकि इन अकाउंट्स को संचालित करने वालों का पता लगाकर कानूनी कार्रवाई की जा सके। एसएचओ विजय वर्धन ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की पहचान उजागर करना गंभीर कानूनी अपराध है और इससे पीड़िता को गहरा मानसिक आघात पहुँचता है।

मूल पॉक्सो मामले की पृष्ठभूमि

8 मई को एक 17 वर्षीय लड़की की शिकायत पर भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुईनाबाद स्थित एक फार्महाउस में उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। प्रारंभ में पॉक्सो एक्ट की धारा 11 और 12 तथा बीएनएस की धारा 74 और 75 के तहत केस दर्ज हुआ था। बाद में पुलिस ने एफआईआर में पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल) के साथ धारा 6 भी जोड़ी, जो गंभीर यौन उत्पीड़न से संबंधित है और जिसके तहत 20 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।

भागीरथ की पलट शिकायत और हाई कोर्ट याचिका

25 वर्षीय बंदी भागीरथ ने करीमनगर में एक पलट शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर ₹5 करोड़ की माँग की थी। इसके अतिरिक्त, भागीरथ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर पॉक्सो केस रद्द करने और अग्रिम जमानत की माँग की है। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के बाद अगली तारीख अगले सप्ताह के लिए तय की है और अंतरिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रख लिया है।

आगे क्या होगा

पुलिस अब सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों की पहचान के लिए तकनीकी जाँच जारी रखेगी। तेलंगाना उच्च न्यायालय में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में भागीरथ की अग्रिम जमानत और अंतरिम राहत पर फैसला आने की संभावना है। यह मामला राज्य में पॉक्सो पीड़ितों की गोपनीयता और सोशल मीडिया की जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी हर हाई-प्रोफाइल मामले में पीड़ित की तस्वीरें और वीडियो वायरल होते हैं — जो दर्शाता है कि प्लेटफॉर्म की स्व-नियामक व्यवस्था विफल है। पुलिस द्वारा यूआरएल एजेंसियों को भेजना सही कदम है, लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब अकाउंट संचालकों की पहचान सार्वजनिक होगी और दोष सिद्ध होगा। राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए — एक केंद्रीय मंत्री के पुत्र का मामला — यह भी देखना होगा कि जाँच की गति और निष्पक्षता पर राजनीतिक दबाव का असर पड़ता है या नहीं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबराबाद पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ क्यों केस दर्ज किया?
साइबराबाद पुलिस ने उन इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया जिन्होंने बंदी भागीरथ के पॉक्सो मामले की पीड़िता और उसके परिवार की पहचान उजागर करने वाले फोटो और वीडियो प्रसारित किए। पॉक्सो मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना किशोर न्याय अधिनियम, बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध है।
बंदी भागीरथ के खिलाफ मूल पॉक्सो मामला क्या है?
8 मई को एक 17 वर्षीय लड़की की शिकायत पर बंदी भागीरथ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पीड़िता ने मुईनाबाद स्थित एक फार्महाउस में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया; बाद में पुलिस ने पॉक्सो की धारा 5(एल) और 6 भी जोड़ी, जिसमें 20 वर्ष या अधिक की सजा का प्रावधान है।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लागू हुई हैं?
पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74, भारतीय न्याय संहिता की धारा 72(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत केस दर्ज है। मूल पॉक्सो मामले में धारा 11, 12, 5(एल), 6 तथा बीएनएस की धारा 74 और 75 लागू हैं।
बंदी भागीरथ ने क्या पलट आरोप लगाए हैं?
भागीरथ ने करीमनगर में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि पीड़िता के परिवार ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर ₹5 करोड़ की माँग की थी। यह पलट शिकायत अदालत में भागीरथ की कानूनी रणनीति का हिस्सा है।
तेलंगाना उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई कब है?
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सुनवाई के बाद अगली तारीख अगले सप्ताह के लिए तय की है और अंतरिम जमानत पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। भागीरथ ने पॉक्सो केस रद्द करने और अग्रिम जमानत की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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