पॉक्सो केस में बंदी संजय के बेटे की गिरफ्तारी की मांग, हैदराबाद में बीआरएस का धरना
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने मंगलवार, 12 मई को हैदराबाद के अंबरपेट में धरना प्रदर्शन कर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। भागीरथ के खिलाफ 8 मई को साइबराबाद कमिश्नरेट के पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पॉक्सो) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी कथित तौर पर फरार बताया जा रहा है।
प्रदर्शन का घटनाक्रम
बीआरएस विधायक कालेरू वेंकटेश पार्टी के नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं के साथ अंबरपेट धरने में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि बंदी भागीरथ को बिना किसी देरी के हिरासत में लिया जाए और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित किया जाए।
बीआरएस ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यदि किसी को बंदी भागीरथ के ठिकाने की जानकारी हो, तो वे नज़दीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। पार्टी ने इसे सार्वजनिक अपील के रूप में प्रसारित किया।
कांग्रेस सरकार पर आरोप
बीआरएस विधायक वेंकटेश ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि आरोपी को बचाने के लिए पीड़िता और उसके परिवार के विरुद्ध हनी ट्रैप का मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि दूसरे मामलों में सरकार ने त्वरित गिरफ्तारियाँ कीं, लेकिन इस मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है।
बीआरएस ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए और नाबालिग पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए।
इस्तीफे की मांग
बीआरएस नेताओं ने माँग की कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें। पार्टी ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, वह यह लड़ाई जारी रखेगी।
पॉक्सो मामले की पृष्ठभूमि
8 मई को दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, बंदी भागीरथ पर एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का आरोप है। यह मामला साइबराबाद कमिश्नरेट के अंतर्गत पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज है। आरोपी के फरार होने की खबरों के बीच विपक्षी दल बीआरएस का यह प्रदर्शन राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। आगे की कार्रवाई पुलिस की जाँच की दिशा और न्यायालय के निर्देशों पर निर्भर करेगी।