सेबी ने इनविट्स को 49% लीवरेज सीमा के ऊपर उधारी की दी अनुमति, इंफ्रा फंडिंग को मिलेगी रफ्तार

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सेबी ने इनविट्स को 49% लीवरेज सीमा के ऊपर उधारी की दी अनुमति, इंफ्रा फंडिंग को मिलेगी रफ्तार

सारांश

सेबी ने इनविट्स के लिए उधारी नियमों में बड़ी राहत दी है — अब 49% लीवरेज सीमा पार करने के बाद भी कैपेक्स और सड़क रखरखाव के लिए नया कर्ज लिया जा सकेगा। रीफाइनेंसिंग की सुविधा भी मिली, लेकिन केवल मूल राशि तक। यह कदम इंफ्रा फंडिंग को नई गति दे सकता है।

मुख्य बातें

सेबी ने 15 मई 2026 को इनविट्स के लिए उधारी नियमों में राहत देने वाला सर्कुलर जारी किया।
49% लीवरेज सीमा से ऊपर भी कैपेक्स और परिसंपत्ति क्षमता विस्तार के लिए नई उधारी की अनुमति दी गई।
सड़क इंफ्रा परियोजनाओं के गैर-रूटीन रखरखाव खर्चों के लिए भी अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट मिली।
इनविट्स, SPV और होल्डिंग कंपनियों को मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति, परंतु केवल मूल राशि तक — ब्याज या शुल्क शामिल नहीं।
यह ढाँचा 17 अप्रैल 2026 के सेबी इनविट नियमों के रेगुलेशन 20(3)(बी)(ii) संशोधन के अनुरूप तुरंत प्रभाव से लागू।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) के लिए उधारी नियमों में महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की। अब वे इनविट्स जिनका लीवरेज एसेट वैल्यू के 49 प्रतिशत से अधिक है, तय सीमा के ऊपर भी नई उधारी ले सकेंगे। इस कदम का सीधा उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के वित्तपोषण में लचीलापन बढ़ाना और सेक्टर में पूंजी की पहुँच को सुगम बनाना है।

नए नियमों में क्या बदला

सेबी के सर्कुलर के अनुसार, 49 प्रतिशत की लीवरेज सीमा से ऊपर ली गई नई उधारी का उपयोग पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) के लिए किया जा सकेगा। इसका मकसद परिसंपत्तियों के परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाना या परियोजनाओं की क्षमता में विस्तार करना है। यह संशोधित ढाँचा 17 अप्रैल 2026 को सेबी इनविट नियमों के रेगुलेशन 20(3)(बी)(ii) में किए गए बदलावों के अनुरूप है और तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

सड़क इंफ्रा परियोजनाओं को विशेष राहत

नियामक ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़े बड़े रखरखाव खर्चों के लिए भी अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी है। सेबी ने स्पष्ट किया कि 'बड़े रखरखाव खर्च' से तात्पर्य उन गैर-रूटीन दायित्वों से है जो कंसेशन एग्रीमेंट के तहत अनिवार्य होते हैं और सामान्य रखरखाव का हिस्सा नहीं होते। सेबी के अनुसार, "बड़े रखरखाव खर्च का मतलब सड़क परियोजना के रखरखाव पर होने वाला ऐसा खर्च है, जो सामान्य रखरखाव का हिस्सा नहीं है और कंसेशन एग्रीमेंट में तय दायित्वों और आवश्यकताओं के अनुसार किया जाता है।" यह राहत खासतौर पर सड़क क्षेत्र केंद्रित इनविट्स के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, जिन्हें समय-समय पर भारी मरम्मत कार्यों के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है।

रीफाइनेंसिंग की भी मिली सुविधा

सेबी ने इनविट्स, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) और होल्डिंग कंपनियों को तय शर्तों के अधीन मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति भी दी है। हालाँकि, नियामक ने यह भी स्पष्ट किया कि रीफाइनेंसिंग केवल मूल कर्ज राशि तक ही सीमित रहेगी। सेबी के अनुसार, "रीफाइनेंसिंग केवल कर्ज के मूल हिस्से की होगी — जमा ब्याज या किसी भी प्रकार के शुल्क को रीफाइनेंस नहीं किया जाएगा।" इस प्रकार जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य देनदारियाँ इस सुविधा के दायरे से बाहर रहेंगी।

इंफ्रा सेक्टर पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की माँग तेजी से बढ़ रही है और इनविट्स को दीर्घकालिक पूंजी जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। गौरतलब है कि इनविट्स भारत में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढाँचे में दीर्घकालिक निवेश का एक प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। नए नियमों से इनविट्स को परिसंपत्तियों को मजबूत करने और विस्तार परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अधिक परिचालन लचीलापन मिलेगा।

आगे क्या

चूँकि ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं, बाजार विश्लेषकों की नजर इस बात पर होगी कि उच्च लीवरेज वाले इनविट्स इस छूट का उपयोग किस प्रकार और कितनी तेजी से करते हैं। सड़क क्षेत्र के इनविट्स के लिए यह राहत अगले वित्त वर्ष की पूंजी योजनाओं पर सीधा असर डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्निहित जोखिम भी है — उच्च लीवरेज वाले इनविट्स को और कर्ज लेने की छूट देना तब तक ठीक है जब तक परिसंपत्तियों से नकदी प्रवाह स्थिर रहे। सड़क क्षेत्र में टोल राजस्व की अनिश्चितता और रखरखाव लागत में वृद्धि को देखते हुए, यह राहत दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन की कीमत पर न आए, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा। रीफाइनेंसिंग को मूल राशि तक सीमित रखना एक समझदारी भरा प्रावधान है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि नियामक इन छूटों के उपयोग की निगरानी कितनी सख्ती से करता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने इनविट्स के लिए उधारी नियमों में क्या राहत दी है?
सेबी ने इनविट्स को एसेट वैल्यू के 49% से अधिक लीवरेज होने पर भी नई उधारी लेने की अनुमति दी है, बशर्ते यह कर्ज पूंजीगत खर्च या परिसंपत्ति क्षमता विस्तार के लिए हो। यह नियम 15 मई 2026 से तुरंत प्रभाव से लागू हैं।
इनविट्स में 49% लीवरेज सीमा क्या होती है?
इनविट्स के लिए सेबी के नियमों के तहत कुल उधारी एसेट वैल्यू के 49% से अधिक नहीं होनी चाहिए — यह सीमा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए तय की गई है। नए सर्कुलर से पहले इस सीमा के ऊपर किसी भी उद्देश्य के लिए नई उधारी की अनुमति नहीं थी।
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर इनविट्स को इस राहत से कैसे फायदा होगा?
सड़क क्षेत्र के इनविट्स को कंसेशन एग्रीमेंट के तहत अनिवार्य गैर-रूटीन रखरखाव खर्चों के लिए अब अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा मिलेगी। इससे बड़े मरम्मत कार्यों के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा और परियोजनाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
रीफाइनेंसिंग की अनुमति किन शर्तों पर दी गई है?
सेबी ने इनविट्स, SPV और होल्डिंग कंपनियों को मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति दी है, लेकिन यह केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित होगी। जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य कोई भी शुल्क रीफाइनेंसिंग के दायरे में नहीं आएगा।
यह संशोधन किस नियम के तहत लागू हुआ है?
यह संशोधित ढाँचा 17 अप्रैल 2026 को सेबी इनविट नियमों के रेगुलेशन 20(3)(बी)(ii) में किए गए बदलावों के आधार पर लागू किया गया है। इन बदलावों के जरिए लीवरेज सीमा के ऊपर उधारी के उपयोग को व्यापक बनाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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