ईंधन मूल्यवृद्धि पर विपक्ष का तीखा प्रहार: कांग्रेस-एनसीपी का आरोप — चुनाव बाद जनता पर थोपी महंगाई
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दलों ने 15 मई 2026 को केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी — शरद पवार गुट (एनसीपी-एसपी) के नेताओं ने एक स्वर में आरोप लगाया कि पाँच राज्यों के चुनाव समाप्त होते ही सरकार ने ईंधन के दाम बढ़ाकर आम जनता पर महंगाई का बोझ डाल दिया है। विपक्ष का कहना है कि तेल आपूर्ति संकट और कच्चे तेल की कीमतों के प्रबंधन में सरकार की योजना का अभाव इस स्थिति की मूल जड़ है।
एनसीपी-एसपी का तर्क: कच्चे तेल की कीमत और खुदरा दाम का विरोधाभास
एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने सरकार की नीति पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मनमोहन सिंह की सरकार थी, तब कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल थी और उस दौर में भी पेट्रोल-डीजल ₹60 प्रति लीटर के आसपास मिलते थे। उनके अनुसार, भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद कच्चे तेल की वैश्विक कीमत में भारी गिरावट आई, लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं को देने की बजाय खुदरा दाम बढ़ाए गए।
रोहित पवार ने यह भी कहा कि जब कच्चे तेल के दाम कम थे, तब भी जनता से अधिक वसूली की गई, और अब जब कीमतें बढ़ रही हैं तो फिर बोझ उपभोक्ता पर डाला जा रहा है। उन्होंने ईरान के साथ कूटनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि संबंध उचित स्तर पर न होने के कारण तेल का भंडार घटा है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने माँग की कि केंद्र सरकार स्पष्ट करे कि देश में कितने दिन का तेल भंडार शेष है।
कांग्रेस नेताओं की चेतावनी: आगे और बढ़ सकते हैं दाम
कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री अभी भी जनता को गुमराह कर रहे हैं और कांग्रेस पर अफवाह फैलाने का आरोप मढ़ रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर पेट्रोल उपलब्ध ही नहीं है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के आयात में आ रही कठिनाइयाँ सर्वविदित हैं और सरकार को जनता को भरोसे में लेना चाहिए, न कि भ्रमित करना चाहिए। उनके अनुसार, आने वाले दिनों में तेल के दाम और भी बढ़ सकते हैं।
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कहा कि जब प्रधानमंत्री ने ईंधन बचत की अपील की थी, तभी यह स्पष्ट हो गया था कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाँच राज्यों के चुनावों के दौरान दाम नहीं बढ़ाए गए और मतदान समाप्त होते ही वृद्धि लागू कर दी गई। जगताप ने कहा कि ईंधन महंगा होने से अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ते हैं, जिससे महंगाई की मार और गहरी होती है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि इस मूल्यवृद्धि का असर किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार की 'घर से काम करें' की सलाह को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे समस्या का कोई वास्तविक समाधान नहीं होगा।
उत्तराखंड की चिंता: चारधाम यात्रा और छोटे व्यवसायों पर असर
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण महंगाई पहले से ही बढ़ रही थी और ईंधन मूल्यवृद्धि से स्थिति और विकट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में लोग छोटे-छोटे रोज़गार से अपना जीवन यापन करते हैं और बढ़ती महंगाई से उनके काम-धंधे बंद होने का खतरा है। रावत ने विशेष रूप से चारधाम यात्रा पर पड़ने वाले असर की चेतावनी दी और कहा कि आने वाले कुछ ही दिनों में इसका प्रभाव दिखने लगेगा।
उन्होंने सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाने की घोषणा को भी प्रतीकात्मक बताया और कहा कि मंत्री स्कूटी पर निकलते हैं, लेकिन उनके पीछे तीन गाड़ियाँ चलती हैं — यह ऊर्जा बचत का नाटक है, वास्तविक प्रयास नहीं।
आम जनता पर असर और आगे की राह
विपक्षी नेताओं के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत में वृद्धि होती है, जो अंततः खाद्य पदार्थों, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा करती है। कथित तौर पर कई स्थानों पर ट्रक सड़कों पर खड़े हैं क्योंकि उन्हें ईंधन उपलब्ध नहीं हो रहा। इस स्थिति पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति संकट लंबा खिंचा, तो इसका असर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ सकता है।