एलपीजी सिलेंडर की कमी पर विपक्ष का केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार
सारांश
Key Takeaways
- एलपीजी सिलेंडर की कमी की समस्या देश भर में बढ़ रही है।
- विपक्ष ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
- महंगाई का बोझ आम जनता पर बढ़ रहा है।
- सरकार को स्पष्टता के साथ स्थिति बतानी चाहिए।
- ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न बड़े शहरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार की नीतियों और दावों को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने मुंबई और बेंगलुरु के रेस्टोरेंट्स में एलपीजी सिलेंडर की कमी पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इसकी कमी पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है, लेकिन हमारी सरकार देशवासियों को झूठ बोलकर गुमराह कर रही है। सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त एलपीजी और पेट्रोल-डीजल है, जबकि 80 प्रतिशत पेट्रोल-डीजल और कच्चा तेल विदेश से आता है। ऐसे में कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आ गई है, लेकिन केंद्र सरकार जनता को धोखा दे रही है। उनकी गलत नीतियों के कारण देश को भारी नुकसान हो रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया में कमी है, लेकिन केंद्र सरकार एलपीजी, पेट्रोल और डीज़ल के बड़े भंडार का दावा कर रही है।
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज कुशवाहा मौर्य ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "केंद्र सरकार लगातार आम जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही है। गैस की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और अब गैस की कमी की खबरें आ रही हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।" मध्य-पूर्व में बनते हालात और युद्ध जैसी स्थिति का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करे ताकि लोगों को समय पर गैस और अन्य आवश्यक संसाधन मिल सकें।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी एलपीजी की कमी के लिए केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि पहले सरकार ने घरेलू और कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ाए और अब गैस की कमी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई स्थानों पर घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन से पहले नहीं हो पा रही है। यह स्थिति सरकार की नीतियों की विफलता को दिखाती है।
प्रमोद तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी जिक्र किया और कहा कि अगर भारत को ऊर्जा संसाधनों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है तो यह चिंताजनक है। सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्टता से स्थिति बतानी चाहिए और देश में गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाना चाहिए।