मध्य प्रदेश में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें: उपभोक्ताओं में चिंता
सारांश
Key Takeaways
- गैस आपूर्ति में कमी की आशंका
- लंबी कतारें गैस एजेंसियों के बाहर
- सरकार द्वारा विशेष दिशा-निर्देश
- जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक
- तीन सदस्यीय समिति का गठन
भोपाल, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का मध्य प्रदेश की एलपीजी गैस आपूर्ति पर गहरा असर देखने को मिल रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगने लगी हैं और उपभोक्ता चिंतित हैं कि क्या उन्हें गैस समय पर उपलब्ध होगी।
इन दोनों देशों के बीच युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में बाधा आई है, लेकिन भारत में इनकी उपलब्धता को लेकर सरकार का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध हैं। आगामी संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किए हैं और मध्य प्रदेश में भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
राज्य में कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति रुक गई है, जिसका असर चाय-नाश्ते की दुकानों से लेकर होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ा है। जहां एक ओर कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका आम उपभोक्ताओं को चिंता में डाल रही है।
इसी कारण से उपभोक्ता ऑनलाइन के अलावा गैस एजेंसियों पर जाकर नंबर लगा रहे हैं, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।
सरकार का दावा है कि एलपीजी उपभोक्ताओं को किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा और प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है जो आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।
कांग्रेस पार्टी की ओर से लगातार गैस संकट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार आवश्यक कदम उठाने में विफल रही है। कई क्षेत्रों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की कतारें हैं, जबकि डीजल और पेट्रोल सामान्य उपभोक्ताओं को आसानी से मिल रहा है।