नीट पेपर लीक: सपा नेता माता प्रसाद पांडेय बोले — शिक्षा मंत्री को अब तक इस्तीफा दे देना चाहिए था
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने नीट यूजी पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अब तक इस्तीफा दे देना चाहिए था। 15 मई को दिए गए अपने बयान में उन्होंने सवाल उठाया कि लाखों छात्रों की मेहनत बर्बाद करने का जिम्मेदार कौन है और उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
माता प्रसाद पांडेय का आरोप
माता प्रसाद पांडेय ने कहा, 'छात्रों की जो मेहनत बर्बाद हुई, उसका जिम्मेदार कौन है? अब उन्हें फिर से मेहनत करनी होगी। इससे बच्चों पर भार पड़ा या नहीं?' उन्होंने यह भी कहा कि कई पेपर अब तक लीक हो चुके हैं और लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है। परीक्षा रद्द होने और पुनः परीक्षा की घोषणा के बाद कई छात्रों के परेशान होने और कुछ के आत्महत्या की खबरों पर उन्होंने गहरी चिंता जताई।
कांग्रेस नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने आरोप लगाया कि पिछले 7-8 वर्षों में एक ऐसी व्यवस्था बन गई है जहाँ सत्ता में बैठे लोगों को लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के पीछे एक बड़ी साजिश है और सरकार वर्षों तक इसे नजरअंदाज करती रही। जगताप के अनुसार, जब पहली बार पेपर लीक हुआ था, तभी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने दावा किया कि लगभग 100 प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं, जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता और चिंता के साथ हल किया जाना चाहिए।
सरकार का जवाब और नई परीक्षा तिथि
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि नीट यूजी की पुनः परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने एक बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए कहा कि अगले वर्ष से नीट यूजी परीक्षा पारंपरिक ओएमआर आधारित प्रणाली के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
नीट यूजी परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विभिन्न दलों के कड़े विरोध के बाद ही सरकार पुनः परीक्षा कराने पर मजबूर हुई।
आम छात्रों पर असर
विपक्षी नेताओं के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों का मानसिक और शैक्षणिक नुकसान हुआ है। पुनः परीक्षा की तैयारी का बोझ उन छात्रों पर भी पड़ा है जिन्होंने ईमानदारी से पहली परीक्षा दी थी। आगे देखना होगा कि 21 जून की पुनः परीक्षा और CBT मोड में बदलाव की घोषणा छात्रों का भरोसा बहाल कर पाती है या नहीं।