27 जून 2026
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नीट यूजी 2026 रद्द: कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, 25 लाख छात्र प्रभावित

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नीट यूजी 2026 रद्द: कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा, 25 लाख छात्र प्रभावित

सारांश

नीट यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से 25 लाख छात्र प्रभावित हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एआईएमआईएम ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की है। विपक्ष ने इसे 'संगठित अपराध' और 'भ्रष्ट व्यवस्था' का नतीजा बताया है।

मुख्य बातें

नीट यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द की गई, जिससे लगभग 25 लाख छात्र प्रभावित हुए।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की माँग की।
मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई है; विपक्ष ने इसे 'समय की बर्बादी' बताया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि 25 लाख छात्रों का अर्थ है 1 करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार से जवाबदेही माँगी।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर और अन्य विपक्षी नेताओं ने मंगलवार, 12 मई 2026 को पेपर लीक के आरोपों के चलते नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही और इस्तीफे की माँग करते हुए इस घटना को 'भ्रष्ट व्यवस्था' का प्रतिबिंब करार दिया। परीक्षा रद्द होने से देशभर के लगभग 25 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देनी होगी।

मुख्य घटनाक्रम

पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने नीट यूजी 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया और मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी। यह घटना देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक को लेकर विपक्ष और छात्र समुदाय में गहरे आक्रोश का कारण बनी है। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का यह कोई पहला मामला नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में भी इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार में बार-बार पेपर लीक होना आम बात हो गई है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

कुछ गिरफ्तारियाँ होती हैं और फिर वही ढर्रा जारी रहता है। असली सवाल यह है कि क्या सीबीआई जाँच केवल निचले स्तर के दोषियों तक सीमित रहेगी, या उन नीतिगत खामियों की भी पड़ताल होगी जो इस 'संगठित अपराध' को बार-बार संभव बनाती हैं। 25 लाख छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य दाँव पर है — महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी से यह संकट हल नहीं होगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट यूजी 2026 परीक्षा क्यों रद्द की गई?
नीट यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के सामने आने के बाद रद्द की गई। मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई है और प्रभावित 25 लाख छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।
नीट यूजी 2026 रद्द होने से कितने छात्र प्रभावित हुए हैं?
परीक्षा रद्द होने से लगभग 25 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के अनुसार, प्रत्येक परिवार में औसतन पाँच सदस्यों को मानें तो 1 करोड़ से अधिक परिवार इससे प्रभावित हुए हैं।
कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँगा?
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने परीक्षा प्रणाली का मज़ाक उड़ाया है और हर बार पेपर लीक के बाद केवल जाँच समिति बनाई जाती है, कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला जाता। इसलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की माँग की।
नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई जाँच का क्या महत्व है?
सरकार ने पेपर लीक की जाँच सीबीआई को सौंपी है। हालाँकि विपक्षी नेताओं ने इसे 'समय की बर्बादी' बताया और कहा कि जब तक जिम्मेदार नेता इस्तीफा नहीं देते, तब तक जाँच का कोई वास्तविक असर नहीं होगा।
अन्य विपक्षी दलों ने नीट रद्द होने पर क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने कहा कि इन घटनाओं से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पर लोगों का भरोसा टूट जाएगा। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से छात्रों और अभिभावकों के प्रति जवाबदेही माँगी।
राष्ट्र प्रेस
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