मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करेंगे भोजशाला स्थल का निरीक्षण

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करेंगे भोजशाला स्थल का निरीक्षण

सारांश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भोजशाला स्थल का व्यक्तिगत दौरा करेंगे। यह दौरा मामले की अगली सुनवाई से पूर्व किया जाएगा, जिससे विवादित स्थल की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।

Key Takeaways

  • न्यायालय का व्यक्तिगत दौरा विवाद की समझ में सहायक होगा।
  • अगली सुनवाई २ अप्रैल को होगी।
  • एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट पर आपत्तियों का समय सीमा निर्धारित।
  • दशकों पुराने विवाद में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • न्यायालय ने सर्वाधिक प्राथमिकता पर मामले को लेने का निर्णय लिया।

इंदौर, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर शाखा के न्यायाधीश अगली सुनवाई से पूर्व विवादित भोजशाला स्थल का व्यक्तिगत दौरा करने का निर्णय लिया है। विभाजित बेंच ने स्पष्ट किया कि वह इस स्थल का 'व्यक्तिगत निरीक्षण' करना चाहती है।

अपने आदेश में, न्यायालय ने कहा कि बेंच अगली सुनवाई की तारीख से पहले स्थल का दौरा करेगी और इस निरीक्षण के दौरान न्यायाधीशों के साथ किसी अन्य व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं होगी।

न्यायमूर्ति विजय शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने मामले में आगे की कार्यवाही तय करते हुए यह टिप्पणी की।

न्यायाधीशों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने मामले के त्वरित निपटारे के लिए पहले ही निर्देश जारी किए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई और निर्णय यथाशीघ्र होना चाहिए। अगली सुनवाई की तारीख २ अप्रैल निर्धारित की गई है।

सोमवार को हुई कार्यवाही के दौरान, खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट पर प्रस्तुत सुझावों और आपत्तियों को सुना।

यह भी दर्ज किया गया कि इस बैच में पांच संबंधित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की जा रही है।

अदालत ने २३ फरवरी के अपने पूर्व आदेश को याद करते हुए सभी पक्षों को एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और सिफारिशें दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया था।

एएसआई ने २२ मार्च, २०२४ से शुरू होकर १०० दिनों की अवधि में पूरे परिसर का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण और जांच की थी।

पीठ ने अपने आदेश में आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने २२ जनवरी को इंदौर पीठ को तीन सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का निर्देश दिया था।

पिछली कार्यवाही के दौरान, न्यायालय ने पाया कि सीलबंद सर्वेक्षण रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और सभी पक्षों को इसकी प्रतियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, इसलिए अब न्यायालय के समक्ष दस्तावेज को दोबारा खोलने की कोई आवश्यकता नहीं है।

यह घटनाक्रम दशकों पुराने विवाद में एक महत्वपूर्ण कदम है, और अब अदालत पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एएसआई की जमीनी जांच रिपोर्ट की पड़ताल करेगी।

न्यायाधीशों के व्यक्तिगत दौरे से मामले की आगे की कार्यवाही में और अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

Point of View

NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

भोजशाला मामला क्या है?
भोजशाला मामला एक विवादित स्थल से जुड़ा हुआ है, जहां विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर विवाद है।
अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई २ अप्रैल को निर्धारित की गई है।
न्यायालय का व्यक्तिगत दौरा किस लिए है?
न्यायालय का व्यक्तिगत दौरा स्थल की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए है।
क्या एएसआई रिपोर्ट पर कोई आपत्ति है?
हां, सभी पक्षों को एएसआई रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले का क्या महत्व है?
यह मामला धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और इसका निर्णय कई लोगों को प्रभावित करेगा।
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