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एमपी उच्च न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के दूषित क्षेत्र के लिए योजना पेश करने का निर्देश दिया

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एमपी उच्च न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के दूषित क्षेत्र के लिए योजना पेश करने का निर्देश दिया

सारांश

भोपाल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार करने के लिए 23 मार्च तक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह निर्देश भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की याचिका पर दिया गया है।

मुख्य बातें

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के स्थलों की सफाई के लिए योजना का आदेश दिया गया है।
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य सरकार ने उपचार योजना पर कार्य शुरू किया है।
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
बंद हो चुकी फैक्ट्री से जहरीला कचरा निकाला जाएगा।

भोपाल, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को भोपाल में बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास की दूषित मिट्टी और भूजल के मूल्यांकन और उपचार के लिए २३ मार्च तक एक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह और अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम कर रहे एक गैर-सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिका में दूषित मिट्टी और भूजल के इलाज और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

राज्य सरकार ने इस याचिका का जवाब देते हुए कहा कि दूषित मिट्टी और भूजल के मूल्यांकन और क्षेत्र की सफाई के लिए टेंडर समेत उपचार योजना पर कार्य चल रहा है और उन्होंने और समय मांगा है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने मामले की अगली सुनवाई २३ मार्च को निर्धारित की।

इस दौरान, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के उप सचिव कृष्णकांत दुबे द्वारा हस्ताक्षरित हलफनामे में बताया गया है कि विभाग ने २०२३ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति/कार्यबल के निर्देशों का पालन करते हुए ५ मार्च को एक बैठक की थी।

हलफनामे में कहा गया है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्व यूसीआईएल परिसर और उसके आस-पास की दूषित मिट्टी और भूजल के उपचार के मूल्यांकन, जंग लगे संयंत्र के विषहरण और विसंक्रमण तथा समयबद्ध उपचार जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया है कि निगरानी समिति ने सुझाव दिया कि प्रदेश सरकार एनईईआरआई और एनजीआरआई की सहायता से मिट्टी और भूजल प्रदूषण, पारे के रिसाव और भूजल में जमा कचरे की मात्रा का आकलन करने के लिए नए अध्ययन करवा सकती है। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक एजेंसी/एजेंसियों के समूह की पहचान करने और कार्य योजना प्रस्तुत करने का कार्य किया है।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने ८७.७४ एकड़ भूमि (यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री स्थल) का उपयोग स्मारक स्थापना सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए करने का निर्णय लिया है और इसके लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी।

बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकला ३३७ टन जहरीला कचरा १ जनवरी, २०२५ को भोपाल से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा और जून २०२५ के अंत तक एक निजी अपशिष्ट उपचार संयंत्र में पूरी तरह से जला दिया जाएगा।

इस जहरीले कचरे का निपटान भोपाल गैस त्रासदी के ४० साल से अधिक समय बाद किया जा रहा है, जो २-३ दिसंबर, १९८४ को हुई थी और जिसमें ५,००० से अधिक लोगों की जान गई थी। हालांकि, फैक्ट्री स्थल की दूषित मिट्टी और उसके निकट स्थित तीन तालाब (फैक्ट्री स्थल के उत्तर दिशा में) अभी भी अधिकारियों के लिए एक चुनौती बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है बल्कि भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है। न्यायालय ने सरकार को समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश देकर एक सकारात्मक संकेत दिया है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का क्या महत्व है?
यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री भोपाल गैस त्रासदी का केंद्र थी, जहां 1984 में एक बड़ा गैस रिसाव हुआ था, जिससे हजारों लोगों की जान गई।
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा?
न्यायालय ने सरकार को योजना प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है, जो पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम है।
राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने दूषित मिट्टी और भूजल के उपचार के लिए एक योजना पर काम करने का दावा किया है और समय मांगा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
क्या यह मामला महत्वपूर्ण है?
हाँ, यह मामला पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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