क्या मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई?

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क्या मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई?

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल मामले की गंभीरता को देखते हुए एक राज्य स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति का उद्देश्य पानी में गंदगी के कारणों की जांच करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। स्वास्थ्य संकट से प्रभावित 500 से अधिक लोग हैं।

Key Takeaways

  • मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय समिति बनाई है।
  • 500 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
  • समिति को एक महीने में रिपोर्ट सौंपनी है।
  • भागीरथपुरा में पानी की आपूर्ति में सुधार हो रहा है।
  • दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

इंदौर, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इंदौर के भागीरथपुरा में पानी में गंदगी की घटना की जांच के लिए एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई है और लगभग 500 लोग पानी से संबंधित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में गठित समिति को पानी दूषित होने के पीछे के असली कारणों और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच करने का कार्य सौंपा गया है।

इस समिति में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि और शहरी प्रशासन एवं विकास निदेशालय के आयुक्त संकेत भोड़ावे भी शामिल हैं। इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े को समिति का सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है।

इंदौर जिला प्रशासन के अनुसार, यह समिति घटना के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक, तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी कमियों का विश्लेषण करेगी।

इसके साथ ही समिति दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगी, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सिफारिशें देगी और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी विचार करेगी।

समिति को संबंधित विभागों से रिकॉर्ड, रिपोर्ट और जानकारी प्राप्त करने तथा आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।

अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में स्वास्थ्य स्थिति में काफी सुधार हुआ है और क्षेत्र के 30 प्रतिशत हिस्से में पानी की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी गई है। हालांकि, लोग अब भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि अभी 17 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से सात आईसीयू में इलाजरत हैं।

यह दूषित पानी की घटना दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सामने आई थी, जिससे भागीरथपुरा में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया था।

डायरिया से पीड़ित कुल 450 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से मंगलवार शाम तक 433 मरीजों को छुट्टी दे दी गई।

Point of View

जो न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को चुनौती दे रही है। हमें उम्मीद है कि यह राज्य स्तरीय समिति प्रभावी रूप से जांच करेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

यह समिति कब गठित की गई?
यह समिति 20 जनवरी को गठित की गई।
समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में संजय कुमार शुक्ला, पी. नरहरि, संकेत भोड़ावे और सुदाम खाड़े शामिल हैं।
इस घटना से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
लगभग 500 लोग इस दूषित पानी से प्रभावित हुए हैं।
समिति को रिपोर्ट कब सौंपनी है?
समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
क्या स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है?
हाँ, भागीरथपुरा इलाके में स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है।
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