क्या भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर में दिवंगतों के लिए स्मारक बनेगा? - सीएम मोहन यादव
सारांश
Key Takeaways
- यूनियन कार्बाइड परिसर में दिवंगतों की स्मृति में स्मारक का निर्माण होगा।
- मुख्यमंत्री ने गैस पीड़ितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता जताई।
- 42 वर्षों बाद रासायनिक कचरे का निष्पादन किया गया।
- भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना।
- सरकार का उद्देश्य शहरी विकास और सुशासन स्थापित करना है।
भोपाल, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर का निरीक्षण किया और घोषणा की कि यहां दिवंगतों की याद में एक स्मारक स्थापित किया जाएगा।
सीएम ने बताया कि 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव एक भयानक घटना थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। लगभग 42 वर्षों तक रासायनिक कचरा यहां पड़ा रहा। हमारी सरकार ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार और बिना किसी पर्यावरणीय नुकसान के इस कचरे का सफलतापूर्वक निष्पादन किया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि अब हम सभी वर्गों और प्रभावित व्यक्तियों के साथ मिलकर यूनियन कार्बाइड परिसर का विकास करेंगे और उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में यहां भोपाल गैस त्रासदी में दिवंगत व्यक्तियों की स्मृति में एक स्मारक बनाएंगे। साथ ही, राज्य सरकार सभी गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी रहेगी।
सीएम ने भोपाल के आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का गहन निरीक्षण किया और राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से स्मारक निर्माण के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड फैक्ट्री परिसर में पड़े रासायनिक कचरे का उचित निष्पादन किया जा चुका है। अब हम भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया के विकास के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।
दरअसल, 42 साल पहले हुए हादसे के स्थल से जहरीला कचरा हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री यादव मध्य प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में बिना सेफ्टी मास्क के गए और फैक्ट्री के कोर एरिया का बारीकी से मुआयना किया।
निरीक्षण के बाद सीएम ने बताया कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से जहरीली गैस का रिसाव मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की सबसे भयंकर गैस त्रासदी थी। वर्ष 1984 की रात इस फैक्ट्री से गैस के दुष्प्रभाव के कारण भोपाल ने जो त्रासदी देखी, वह हमारी स्मृतियों से कभी नहीं मिटेगी। गैस त्रासदी के बाद तत्कालीन सरकार ने इस क्षेत्र को लावारिस छोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि फैक्ट्री में फैले जहरीले कचरे के निष्पादन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और इस भीषण त्रासदी के बाद फैक्ट्री बंद कर दी गई। तत्कालीन सरकार के अधिकारियों ने फैक्ट्री के मालिक वॉरेन एंडरसन को यहां से भागने में मदद की। केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान भी इस गैस प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने न्यायालय के सभी निर्देशों का पालन करते हुए पिछले वर्ष यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निष्पादन कराया। यह दुनिया को यह संदेश देता है कि आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पर्यावरण और मानव हानि के बिना जहरीले कचरे को समाप्त किया जा सकता है। राज्य सरकार ने राजधानी के माथे से इस कलंक को मिटाने का कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि शहरी विकास और सुशासन की व्यवस्थाएं स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रही है। अब हमारी सरकार न्यायालय के मार्गदर्शन में परिसर में स्मारक सहित अन्य विकास कार्यों के लिए सुझावों पर अमल करेगी। इसमें सभी पक्षों को चर्चा कर विश्वास में लिया जाएगा। राज्य सरकार इस क्षेत्र के नवनिर्माण के लिए प्रयासरत है।
प्रदेश में विकास कार्यों को गति प्रदान करते हुए राज्य सरकार ने भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। भोपाल सहित आस-पास के 6 जिले इस मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के अंतर्गत आएंगे। इस प्रकार, भोपाल शहर के विकास के लिए सभी बाधाओं को दूर करने के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हमारी सरकार विकास के कारवां को निरंतर गति देती रहेगी।